पूर्वोत्तर भारत के राज्य मिजोरम में बाहरी लोगों को किराए पर संपत्ति नहीं देने की मांग की जा रही है। मिजोरम व्यापारी संघ ने स्थानीय निवासियों से आग्रह किया है कि बाहरी लोगों को किराए पर संपत्ति नहीं दें।  संघ ने सभी स्थानीय और मूल भूस्वामियों, संपत्ति मालिकों को लिखित में अनुरोध पत्र लिखा है। इसमें लिखा गया है कि अन्य राज्यों के लोगों को जमीन, दुकान, मकान और अन्य संपत्तियों को किराया पर नहीं दी जाए। मिजोरम व्यापार संघ (एमआइएमए)  मिजोरम के व्यापारियों का एक संगठन है। इस व्यापार संघ की एक टीम ने इसी  साल अगस्त के महीने में प्रत्येक शनिवार को आइजोल शहर में एक मुहिम के तहत बाहरी लोगों द्वारा चलाई जा रही दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच की थी।

एमआइएमए द्वारा अगस्त महीने में की गई विशेष जांच-अभियान के तहत राजधानी आइजोल में करीब 80 दुकानें बाहरी लोगों द्वारा संचालित की जा रही थी। संगठन की एक टीम ने जांच के बाद एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसके आधार पर एमआइएमए ने शहर के स्थानीय और मूल निवासियों से अपनी किसी भी प्रकार की संपत्ति जैसे दुकान, मकान, जमीन को बाहरी और गैर-मिजो को व्यावसायिक उद्देश्य से किराए पर नहीं देने के लिए कहा है।

संगठन के अध्यक्ष पीसी ललदिन थारा ने कहा है कि यह लिखित-आग्रह और जांच-मुहिम इसलिए कि गई ताकि स्थानीय मिजो समुदाय को बाहरी लोगों के प्रभाव से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि संघ राज्य के स्थानीय मिजो लोगों के हित और राज्य के संरक्षण में सतत और अथक प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को सामान्य तौर पर और खासकर व्यापारियों को राज्य की संवेदनशीलता को लेकर अब सजग हो जाना चाहिए। स्थानीय मिजो दुकानदारों और व्यापारियों को हड़ताल, सड़कमार्ग बाधित होने या शटडाउन की स्थिति में चीजों की कीमतें नहीं बढ़ानी चाहिए।

इसके अलावा राज्य सरकार से इनर-लाइन परमिट (आइएलपी) को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग भी की गई है। संगठन ने राज्य से राजनीतिक दलों, एनजीओ और लोगों से राज्य के संरक्षण के लिए समूहिक प्रयास करने और इस दिशा में उचित कठम उठाने के लिए जोर दिया। मिजोरम में राज्य में अभी मानसून के समय एक बड़ा भूस्खलन होने की वजह से साइरांग और माउलखंग से गुजरने वाला एनएच-54 एक महीने तक बाधित रहा जिसकी वजह से महंगाई तेज गति से बढ़ गई थी।