मिजोरम के आबकारी, नार्कोटिक और ड्रग्स मंत्री के. बेइछुआ ने आइजोल में एक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए कहा कि राज्य में जोरमंथगा की सरकार जल्दी ही शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाएगी। राज्य में जोरमंथगा की सरकार आने के बाद मंत्रिमंडल की पहली बैठक में शराब पर अस्थाई प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया। 21 दिसंबर से राज्य में शराब पर अस्थाई प्रतिबंध चल रहा है। राज्य के विधानसभा चुनाव में शराब पर प्रतिबंध एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना था। राज्य के चर्च संगठनों और नागरिक समाज संगठन भी शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के पक्ष में है। शराब पर प्रतिबंध को मिजो नेशनल फ्रंट-एमएनएफ ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में रखा था।


जोरमथंगा ने सत्ता में आते ही 21 दिसंबर को शराब पर अस्थाई प्रतिबंध लगा दिया था, जो 12 जनवरी तक रहा। फिर इसे 14 फरवरी तक बढ़ाया गया। अब इसे एक और बार बढ़ा दिया, जो  31 मार्च तक प्रभावी रहेगा। सरकार की मानें, तो राज्य में शराब पर स्थाई प्रतिबंध आगामी 1  अप्रैल से लागू हो जाएगा। राज्य में शराब पर अस्थाई प्रतिबंध को बार-बार बढ़ाने की वजह से शराब के कारोबार से जुड़े क्रेताओं और विक्रेताओं ने परेशान होकर गुवाहाटी उच्च न्यायालय की आइजोल पीठ में सरकार के खिलाफ याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि सरकार की स्थाई प्रतिबंध की नीति नहीं होने की वजह से शराब के भंडारण, लाइसेंस और खरीददारों को बकाया और अगला आॅर्डर देने को लेकर अनिश्चितता से उनकी आर्थिक और रोजगार की स्थिति खराब हो गई है।

अभी हाल ही में गुवाहाटी न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से दो हफ्ते में अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। शायद इसलिए सरकार ने 1 अप्रैल से राज्य में शराब पर स्थाई प्रतिबंध की घोषणा की है। सरकार शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए मार्च में विधानसभा के बजट अधिवेशन में एक बिल लेकर आएगी। हालांकि राज्य में शराब पर पहली बार प्रतिबंध फरवरी 1997 में लागू किया था, जब राज्य में लल्थानहाॅला की कांग्रेस सरकार थी, फिर 1998 में जोरमथांगा की एमएनएफ सरकार ने अपने पूर्ववर्ती सरकार के शराब के प्रतिबंध को जारी रखा।