गत 25 जनवरी को मिजोरम में मतदान दिवस को त्यौहार की तरह मनाया गया। राज्य के सभी आठ जिला मुख्यालयों पर मतदान दिवस पर कई कार्यक्रम का आयोजन किए गए। राज्य सरकार के साथ राजनीतिक दलों और नागरिक समाज संघटनों ने राष्ट्रीय मतदान दिवस को हर्षोल्लास से मनाया। जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने अपने – अपने क्षेत्र में मतदान दिवस के अवसर पर कई कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर में समाज और लोकतंत्र के लिए मतदान के अधिकार के महत्व के बारे में बताया गया। नागरिक समाज संघटनों ने मतदान और लोकतंत्र के बारे जन जागरूकता के कार्यक्रम जैसे मतदान में भागीदारी और इसका लोकतंत्र में महत्व को बताया। इस बार मतदान दिवस का विषय है:  एक भी मतदाता पीछे नहीं छूटना है। स्थानीय स्तर पर लोगों ने स्वच्छता अभियान के माध्यम से स्वच्छ लोकतंत्र के महत्व को समझाया। हर बार की तरह इस बार भी राज्य का सबसे बड़ा नागरिक समाज संघठन – यंग मिजो एसोसिएशन (वाईएमए) ने मतदान दिवस पर जनजागृति अभियान चलाकर लोगों को मतदान के प्रति जागरूक किया गया।


मिजोरम में अनोखी चुनावी संस्कृति
राज्य में मतदान को त्यौहार की तरह मनाया जाता है। मिजोरम चुनावी संस्कृति की उत्कृष्ठा के तौर पर देश और दुनिया में एक विशेष पहचान बनाई है। मिजोरम में चुनाव सबसे स्वच्छ,पारदर्शी और कम खर्चीला होता है। राज्य में चुनाव में नागरिक समाज संघटनों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाने में मिजोरम पीपुल्स फोरम – एमपीएफ की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। एमपीएफ का गठन 2006 में राज्य के प्रभावशाली चर्च संगठनों के नेतृत्व में किया गया था। 1986 का शांति समझौता भी मिजो विद्रोहियों (एमएएएफ) और भारत सरकार के बीच सहमति चर्च संगठनों की मध्यस्थता से हुआ था, जिसके परिणामस्वरूप 1987 मिजोरम राज्य की स्थापना हुई। इसके बाद राज्य में चुनाव राजनीति को निष्पक्ष, स्वच्छ और सस्ता करने का श्रेय नागरिक समाज संगठनों को जाता है।


गणतंत्र दिवस का बहिष्कार
पिछले साल जो सेवानिवृत फौजी राज्य में गणतंत्र दिवस समारोह एवं परेड में शामिल हुए थे, वे इस बार गणतंत्र दिवस समारोह का बहिष्कार कर रहे हैं। पिछले 32 साल में ऐसा पहली बार हुआ कि राज्य में नागरिक समाज संगठनों ने गणतंत्र दिवस समारोह का बहिष्कार किया है। बाकायदा राज्य के गृहमंत्री ने जन भावनाओं को देखते हुए इस बार के गणतंत्र दिवस के अवसर पर कोई जनसरोकार की योजना की घोषणा नहीं की जाएगी। सरकारी कार्यालय, कॉलेजों एवं स्कूलों में गणतंत्र दिवस के समारोह का आयोजन नहीं किया जाएगा। केंद्र सरकार के नागरिकता संशोधन बिल का मिजोरम सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र में गत 8 जनवरी से विरोध प्रदर्शन हो रहा है। इस बिल के लागू होने से तीन मुस्लिम बहुल देशों पाकिस्तान, अफग़़ानिस्तान और बांग्लादेश से गैर – मुस्लिम 6 धर्मों के लोग धार्मिक उत्पीडऩ के आधार पर भारत में शरण ले सकता है और सात साल बाद उन्हें भारत की नागरिकता मिल सकती है। इस बिल से पूर्वोत्तर के जनजातीय समुदायों के सामाजिक, राजनीतिक और भौगोलिक हितों को नुकसान पहुंचने की आशंका मानी जाती है।