मिजोरम विधानसभा चुनाव में एमएनएफ से करारी हार के बाद कांग्रेस आने वाले साल में 14 जनवरी के बाद अपने प्रदर्शन की समीक्षा करेगी। राज्य में कांग्रेस के प्रवक्ता लल्लियन छुंगा ने कहा कि क्या चूक हुर्इ है, यह समझने के लिए पार्टी एक बैठक करेगी। जिसमें पार्टी के सभी उम्मीदवार, चुनाव जीतने वाले आैर हारने वाले शामिल होंगे। 


छुंगा ने कहा कि कांग्रेस एक मतबूज पार्टी है आैर हम सुनिश्चित कर रहे

हैं कि एमएनएफ एक दशक तक सत्ता में नहीं रहेगी। क्रिसमस खत्म होने के बाद

हम मध्य जनवरी तक दूसरे विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू करेंगे। उन्होंने

कहा कि राज्य में खुद को दोबारा मजबूत करने के लिए पार्टी हर एक मौके का

फायदा उठाएगी। अभी तो बहुत सारे चुनाव होने बाकी हैं। अगले साल ही लोकसभा

चुनाव होना है। इसके बाद काउंसिल चुनाव होना है। हम अपने प्रदर्शन का

विश्लेषण करेंगे आैर खुद को आैर भी मजबूत बनाएंगे।


मिजोरम में कांग्रेस क्षेत्रिय पार्टी जोराम पीपुल्स मूवमेंट के साथ गठबंधन के बारे में सोच रही है। दरअसल, मिजोरम विधानसभा चुनाव में जोराम पीपुल्स मूवमेंट के प्रमुख लालडुहोमा दो सीटों सेरछिप आैर आइजाॅल वेस्ट-1 से चुनाव लड़े थे। अब जेडपीएम प्रमुख डुहाेमा लोकसभा चुनाव के चलते आइजाॅल वेस्ट-1 की सीट को खाली करने के बारे में सोच रहे हैं। जिस कारण से राज्य में उपचुनाव करवाने पड़ेंगे। बता दें कि ललडुहोमा ने सेरचिप आैर आइजाॅल वेस्ट-1 से चुनाव लड़ था आैर सेरछिप से निवर्तमान मुख्यमंत्री ललथनहवला को हराकर जीत दर्ज की थी। अब डुहोमा आइजाॅल की सीट खाली करके सेरछिप को बरकरार रखने के बारे में सोच रहे  हैं। 

इस पर कांग्रेस, जेडपीएम को उपचुनाव में समर्थन के बारे में सोच रही है, इसलिए वह उपचुनाव में अपने उम्मीदवार को टिकट नहीं देगीं। पार्टी को उम्मीद है कि जेडपीएम लोकसभा चुनाव में उसे समर्थन देगी आैर अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी। राज्य में एमएनएफ की नीतियों को विफल करने के लिए कांग्रेस अभी से रणनीतियां बना रही है। पार्टी प्रवक्ता छुंगा ने कहा कि हम आइजाॅल वेस्ट -1 आैर लोकसभा चुनाव को लेकर बात करेंगे।

जेडपीएम के एक नेता का कहना है कि आइजाॅल वेस्ट -1 को लेकर कांग्रेस के लिए हमारी पार्टी के दरवाजे खुले हैं। इस बार के मिजोरम चुनाव कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा  है। उसके महज पांच सीटें जीती आैर पूर्वोत्तर में अपना अंतिम गढ़ भी गंवा दिया। मुख्यमंत्री ललथनहवला सेरछिप आैर चम्फार्इ दोंनों सीटों से चुनाव हार गए। अगर हम इतिहास को देखें तो कांग्रेस को सत्ता में वापसी के लिए दस सालों का इंतजार करना होगा। अभी तक कांग्रेस आैर एमएनएफ ने मिजोरम में एेसे ही शासन किया है जो भी सत्ता में होती है वह लगातार दस सालों तक रहती हैं। लेकिन कांग्रेस को उम्मीद थी कि इस बार राज्य में यह परंपरा टूटेगी।