भारत में शराबबंदी करने वाले राज्यों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अब मिजोरम में भी शराबबंदी लागू कर दी गई है। ऐसा करने वाला यह भारत का चौथा राज्य बन चुका है। आइजोल में सरकार के एक मंत्री द्वारा दिए गए बयान के अनुसार मिजोरम अब शुष्क राज्यों की श्रेणी में आ चुका है। 20 मार्च को राज्य विधानसभा में सर्वसम्मति से शराब (निषेधक) बिल पारित किया गया।जिसके अनुसार राज्य में शराब का उत्पादन और उपभोग गैर कानूनी होगा।

राज्य के एक्साइज और नारकोटिक्स मंत्री के बेइचुआ ने बताया कि मिजोरम शराब(निषेध और नियंत्रण)या एमएलपीसी अधिनियम 2014 को प्रतिस्थापित करके बनाए गए इस नए कानून को संसदीय चुनावों से पहले राज्यपाल जगदीशमुखी की सहमति मिल गई थी।

उन्होने बताया कि हाल ही में हुए लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में लागू आचार संहिता के कारण विधेयक में कानूनों को लागू नहीं किया गया। रविवार को आचार संहिता हटा लिए जाने के बाद मंगलवार मिजोरम शराब (निषेध) विधेयक को राज्य में लागू किया गया है। बकौल मंत्री ,सत्ताधारी पार्टी मिजो नेशनल फ्रन्ट (एमएनएफ) विधानसभा चुनावों में किये गए अपने वादों को पूरा करने में जुटी हुई है।

आगे बेइचुआ कहते है कि हम खुश है कि राज्य सरकार भावी पीढिय़ों को शराब और नशें को खतरें से बचाने के लिए कदम उठा रही है ।स्पष्ट है कि हम स्वच्छ मिजो समाज बनाने की ओर अग्रसर है। और चुनावों से पहले जनता से किये गये अपने वादों को पूरा कर रहे है। वह बताते है कि उनकी सरकार के इस निर्णय से राज्य को 60 से 70 करोड़ रुपए वार्षिक का नुकसान होगा। परन्तु जन सामान्य के जीवन के आगे यह नुकसान कुछ भी नहीं है।

बेइचुआ ने यह भी बताया कि एमएनएफ सरकार ने रक्षा कर्मियों और चिकित्सकीय आवश्यकताओं के अलावा  सामान्य लोगों के शराब उत्पादित करने,आयात ,विक्रय और उपभोग पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।

नए अधिनियम के तहत रक्षाकर्मियों और पर्यटकों के शराब सेवन के लिए प्रावधान बनाए गए है।उपचार करवा रहे मरीज चिकित्सक के निर्धारण पर ही शराब पी सकते है।

शराब व्यापारी सरकार के इस निर्णय का विरोध कर रहे है।उनका कहना है कि इससे उनके व्यापार को बड़ा नुकसान होगा।

राज्य के आबकारी और नारकोटिक्स विभाग के अनुसार राज्य भर में 43 शराब की दुकानें ,3 बंधुआ गोदाम ,2 बार, और निजी मालिकों के द्वारा चलाई जा रही एक माइक्रो भट्टी है, जिनका लाइसेंस 31 मार्च को समाप्त हो चुका है।

जनवरी 2015 में कांग्रेस सरकार द्वारा शराब की बिक्री और खपत पर से प्रतिबंध हटाने तक मिजोरम 18 वर्षो तक शराबविहीन शुष्क प्रदेश था। बेइचुआ ने दावा किया कि प्रतिबंध हटने के बाद सैकड़ों लोग जिनमें अधिकतर युवा थे, शराब की खपत के कारण और सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए।

आइजोल में हुई एक बैठक में मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा के अनुसार लगभग 6000 लोगों की मौत नीति परिवर्तन के बाद हुई है। शराबबंदी हमारे सबसे बड़े चुनावी वादों में से एक था। ज्ञात हो की बिहार, गुजरात, नागालैण्ड़ और केन्द्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप में पहले से ही शराब पर पाबंदी है।

यहाँ एमएनएफ ने विधानसभा की 40 सीटों में से 26 पर जीत दर्ज की है। यह ईसाई बहुसंख्यक राज्य है, जिसकी जनसंख्या 10910149 (2011 की जनगणना के अनुसार) है।