मिजोरम विधानसभा चुनाव में मिजो नेशनल फ्रंट के धमाकेदार वापसी करते हुए 26 सीटों पर अपना कब्जा कर लिया। इसके साथ ही राज्य से कांग्रेस की विदाई हो गई। इस बीच भाजपा ने भी पहली बार मिजोरम में अपना खाता खोला। बता दें कि भाजपा के बुद्धधान चकमा तुईचवांग सीट से विजयी हुए। चकमा ने इस सीट से एमएनएफ के रसिक मोहन चकमा को 1594 मतों से हराया। बता दें कि पहले ये सीट कांग्रेस के खाते में थी और बुद्धधान चमका ही यहां से विधायक थे। हालांकि चुनाव से पहले उन्होंने पाला बदलते हुए भाजपा का दामन थाम लिया था। 

बता दें कि मिजोरम विधानसभा चुनाव में तुईचवांग सीट से कांग्रेस की टिकट पर 2013 के चुनाव में कांग्रेस से बुद्धधान चकमा ने जीत दर्ज की थी। 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान बुद्ध धन चकमा ने एमएनएफ के रसिक मोहन चकमा को चुनाव हराया था। वहीं 2008 में चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे निरुपम चकमा ने एमएनएफ के रसिक मोहन चकमा को हराया था। 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान इस विधानसभा क्षेत्र में कुल 20900 वैध मत पड़े थे। इस चुनाव के दौरान कांग्रेस के  उम्मीदवार बुद्ध धन चकमा ने एमएनएफ के उम्मीदवार रसिक मोहन चकमा को 8726 मतों से चुनाव में हराया था। चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में 14626 मत पड़े, वहीं इस चुनाव में उप-विजेता रहे एमएनएफ के उम्मीदवार को 5900 मत मिले।

वहीं 2008 के विधानसभा चुनाव के दौरान इस विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे निरुपम चकमा ने एमएनएफ के उम्मीदवार रसिक मोहन चकमा को 3112 मतों से पराजित किया था। इस विधानसभा सीट पर 2008 में हुए मतदान के दौरान कुल 18463 वैध मत पड़े थे। इस चुनावी मुकाबलें में कांग्रेस के विजेता उम्मीदवार को 10421 मत मिले, उप-विजेता एमएनएफ उम्मीदवार को 7309 मत मिला था।

उत्तर पूर्व में स्थित इस राज्य में कुल 40 विधानसभा सीटें हैं। 8 जिलों वाले इस पर्वतीय राज्य में 25 नवंबर 2013 को हुए पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को सत्ता हासिल हुई थी। जिसमें कांग्रेस के ललथनहवला राज्य के मुख्यमंत्री बने। 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्य मुकाबला कांग्रेस और मिजो नेशनल फ्रंट के बीच था। जिसमें कांग्रेस को 34 सीटें मिली थी। इससे पहले भी 2008 के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने 32 विधानसभा सीटें जीती थी। और कांग्रेस के ललथनवा हीं मुख्यमंत्री बने थे।