बहुत विवादों में आई एनजीओ से मध्याह्न भोजन वितरण की व्यवस्था आखिरकार राज्य सरकार ने निरस्त कर दी। राज्य में कांग्रेस सहित तमाम संगठनों ने शिक्षा विभाग की ओर से उठाए गए कदम का प्रबल विरोध किया था।


मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने एक दिन पहले ही एक ब्लैक लिस्टेड एनजीओ को मध्याह्न भोजन वितरण का जिम्मा देने की जांच के आदेश दिए थे। खाद्य विभाग के प्रधान सचिव विश्वरंजन सामाल को एक माह में जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।


सोमवार को इस बारे में मिशन निदेशक समग्र शिक्षा एवं मध्याह्न भोजन योजना के राज्य नोडल अधिकारी शमसेर सिंह की ओर से उपायुक्तों को परिपत्र जारी किया गया है। उसमें कहा गया है कि असम सरकार ने स्कूलों में एनजीओ से मध्याह्न भोजन वितरण कराने के मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

इस परिपत्र में उपायुक्तों को कहा गया है कि वे अपने जिलों के संबंधित जिला मिशन संयोजनक सह मध्याह्न भोजन योजना के सहायक जिला नोडल अधिकारियों को निर्देश दें कि ग्यारह नवंबर से सरकारी स्कूलों के किचेन में ही विद्यार्थियों के लिए मध्याह्न भोजन पहले की तरह तैयार कराकर वितरित किया जाए।

इस आदेश में उपायुक्तों को संबंधित एनजीओ के लिए आवंटित खाद्यान्न बिना देर किए संबंधित स्कूलों को भेजे जाने को भी कहा गया है, ताकि उन्हें मध्याह्न भोजन वितरण में किसी तरह की परेशानी नहीं हो। यह जानकारी संबंधित जिलों में केंद्रीकृत किचेन बनाने वाले एनजीओ को भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।