चुनाव परिणाम तो आगामी 23 मई को हासिल हो जाएंगे। पहले चरण का मतदान आज हो भी गया है। किसकी बातें जनता को अधिक भाई हैं, किसकी कम। लोगों ने फैसला ईवीएम में बंद कर दिया है। जनता के दरबार से परमात्मा के दर पहुंचे कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशी परस्पर ऐसे मिले जैसे वर्षों के बिछाड़े हों। यह नजारा देख हर किसी के चेहरे खिल उठे।


प्रचार के लिए जितने दिन मिले, कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशियों ने एक-दूसरे पर जमकर आरोपों का नजला उतारा। कई अवांतर टिप्पणियां भी कीं। लेकिन आज मतदान के दिन तेजपुर संसदीय क्षेत्र में वह विरल दृश्य दिखा, जो देश में शायद ही कहीं और देखने को मिला हो।


एक-दूसरे के कट्टर विरोधी भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी पल्लब लोचन दास और एमजीवीके भानु राजा बाण के बनवाए बताए जाने वाले प्रागैतिहासिक काल के महाभैरव मंदिर में माथा टेकने पहुंचे थे। तेजपुर स्थित महाभैरव मंदिर भगवान शंकर के सिद्ध और जाग्रत मंदिरों में गिना जाता है। मान्यता है कि यहां जो भी कामना आप लेकर पहुंचते हैं, बाबा भोलेनाथ पूरी करते हैं। आज तो शायद उनकी भी परीक्षा का दिन आ गया है।

देखना रोचक होगा कि मतदाता-भगवान तक बाबा भोलेनाथ ने किस भक्त की मनोकामना पूर्ण करने का संदेश भेजा होगा। आखिर दोनों ही तो परमपिता परमेश्वर के दरबार में अपना-अपनी चुनावी जीत की कामना लेकर पहुंचे थे। यह भी भगवान की माया ही थी कि दोनों लगभग एक ही समय वहीं पहुंचे। यह भी ईश्वर की कृपा ही थी कि एक दूसरे के खिलाफ मुकाबले पर उतरे दोनों महारथी परस्पर सौहार्दपूर्ण भाव से ऐसे मिले जैसे काफी समय से बिछड़े रहे हों।


पिछले साल ही राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव पद से अवकाश ग्रहण करने वाले एमजीवीके भानु असम के श्रम और चाय जनजाति कल्याण राज्यमंत्री पल्लब लोचन दास के हाथों को अपने हाथों में लिए इस तरह मुस्कुरा रहे थे, जैसे कोई बड़ा-बुजुर्ग अपने परिवार के सदस्य से अरसे बाद मिला हो।


यह भी लोकतंत्र की खूबसूरती है कि चंद माह तक राजकीय डेकोरम के मुताबिक एक अतिरिक्त मुख्य सचिव राज्य सरकार के जिस मंत्री को सर कहकर आदेश पालन को तत्पर रहता था, आज उसी लोकतंत्र के सबसे प्रमुख पर्व पर बराबरी, बल्कि कुछ बुजुर्गियत के भाव से हाथ पकड़े परमस्ता के सामने प्रार्थना करने को आतुर दिख रहा था।