गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी को मंगलवार को उस समय हिरासत में ले लिया गया जब वह घोघा में दलित आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या मामले में कार्रवाई न होने पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। वडगाम निर्वाचन क्षेत्र से एकमात्र निर्दलीय विधायक मेवाणी और लगभग 20 अन्य लोगों को मंगलवार को सचिवालय पहुंचने से पहले ही गांधीनगर में एमएलए क्वार्टर से हिरासत में लिया गया।

खबरों के अनुसार, पुलिस सुरक्षा के बावजूद दलित आरटीआई कार्यकर्ता अमरभाई बोरिचा की 3 मार्च को उनके ही घर में हत्या कर दी गई थी। मेवाणी ने घोषणा की थी कि वह इस हत्या को लेकर प्रशासन की निष्क्रियता के खिलाफ सचिवालय के प्रवेश द्वार पर मंगलवार को प्रदर्शन करेंगे। बोरिचा के परिजनों के मुताबिक, कुछ लोगों, जिसमें ज्यादातर उच्च जाति के क्षत्रिय समुदाय के लोग शामिल थे, ने बोरिचा को लोहे की पाइप से पीटा और धारदार तलवार से मार डाला। गुजरात प्रदेश सचिवालय के गेट के पास प्रदर्शन कर रहे 25 अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया।

मेवाणी ने पिछले शुक्रवार को विधानसभा के बजट सत्र में सब इंस्पेक्टर पी.आर. सोलंकी की गिरफ्तारी का मुद्दा भी उठाया था। उन्होंने गृह मंत्री प्रदीपसिंह जडेजा और मुख्यमंत्री विजय रूपाणी पर भी उंगली उठाई। उन्होंने सवाल किया कि क्या उनका सोलंकी के साथ कोई संबंध है क्योंकि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया। बहरहाल, अपने विरोध में मेवाणी ने सदन में एक प्लेकार्ड भी प्रदर्शित किया था। इससे नाराज होकर सदन के स्पीकर राजेंद्र त्रिवेदी ने उन्हें दिनभर के लिए निलंबित कर दिया था। सूत्रों के अनुसार, बोरिचा परिवार सनोदर गांव में अकेला दलित परिवार है, जिसमें मुख्य रूप से क्षत्रिय समुदाय का वर्चस्व है।