मैट्रिक फेल मगर दिमाग से शातिर एक युवक पिछले लंबे समय से असम में बैठकर अमरीका में कार्य रहे चिकित्सक, अभियंता सहित कई बड़े अधिकारियों को चूना लगा रहा था। इस कार्य में आरोपी की महीने की कमाई सारे खर्चे छोड़कर कम से कम 50 लाख रुपए थी। यह खुलासा सीआईडी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक डाॅ. एलआर बिश्नोई ने मंगलवार को किया। उन्होंने बताया कि फर्जी काॅल सेंटर चला रहा मास्टर माइंड राजेश खान उर्फ मुखर्जी उर्फ राजेश भाई इससे पहले भी वशिष्ठ पुलिस द्वारा गिरफ्तार हो चुका है। वशिष्ठ पुलिस ने भी उसे फर्जी काॅल सेंटर चलाने के आरोप में जेल भेजा था, मगर रिहा होने के बाद वह पुनः इस धंधे में उतर गया।


आरोपी अपने कर्मचारियों को पूरे ठाट-बाट में रखता था। कर्मचारियों को रात के अंधेरे में काॅल सेंटर तक लाने से लेकर सुबह होने के बीच खाने-पीने की सभी तरह की वस्तुओं के अलावा उनके रहने की पूरी व्यवस्था भी कर रखी थी। इतना ही नहीं, विदेशों से आमदनी होने वाले डाॅलर के अनुसार उन्हें सैलरी के अलावा कमीशन भी दिया जाता था।

फ्लैट पूरी तरह सीसीटीवी कैमरों से लैस था। वहां की हर हरकत पर राजेश भाई का एक गुर्गा चौबीसों घंटे मोनिटर पर बैठकर निगरानी करते रहता था। फ्लैंट भीतर से बंद रहता था और खिड़कियों पर काले कांच लगा दिए गए थे ताकि बाहर से कोई भीतर झांक न सके। वहीं मुख्य आरोपी राजेश भाई खुद अपने परिवार के साथ जालुकबाड़ी के राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित होटल हाईवे पैलेस में रह रहा था। बिश्नोई ने कहा कि आरोपी भले ही मैट्रिक फेल हो, मगर उसने अपने खुराफाती दिमाग से विदेश में बैठे पढ़े-लिखे लोगों को अब तक संभवतः करोड़ो का चूना लगाया है।