विधानसभा सत्र को लेकर जनप्रतिनिधि कितने गंभीर और सजग रहते हैं, उसकी मिसाल मंगलवार को सदन में  दिखाई दी। मौका था-मेंबर्स आवर यानी सदस्य का समय। सदन की इस कार्यवाही के तहत जन प्रतिनिधियों को अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित समस्याओं को सरकार के समक्ष रखने का विशेष मौका दिया जाता है ताकि उसके समाधान के लिए सरकार पहल कर सके। मंगलवार को मेंबर्स आवर के दौरान अध्यक्ष की कुर्सी पर राजद्वीप ग्वाला सदन का संचालन कर रहे थे।

इस विशेष कार्यक्रम के जारी रहने के दौरान एक समय ऐसा भी देखा गया कि सदन में चर्चा जारी रहने के लिए न्यूनतम जितने सदस्यों की उपस्थिति रहनी चाहिए, उतनी थी नहीं। एआईयूडीएफ का एक भी विधायक उस समय सदन में मौजूद नहीं था। सत्तपाक्ष के भी अधिकांश विधायक सदन के बाहर थे। विधानसभा सदस्यों के लिए रखी गई इस चर्चा के दौरान उनमें से अधिकांश की सदन में गैर-मैजूदगी से यह सवाल उठता है कि आखिर अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर जन प्रतिनिधि कितने गंभीर हैं।

एक विधायक ने कोरम न होने की ओर ध्यान आकृष्ट किया तो अध्यक्ष की कुर्सी पर उस समय बैठे राजद्वीप ग्वाला को घंटी बजाना पड़ी। उस समय सुबह के  11.20 बजे थे। सदन में घंटी बजने की आवाज सुन बाहर गप्पे हांक रहे  अथवा कैंटिन में चाय पी रहे सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायक सदन में एक-एक कर दाखिल होने लगे और सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हूई। मालूम हो  कि अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं को रखना था।

इनमें भाजपा विधायक अंगूरलता डेका, गुरुज्योति दास, कांग्रेस विधायक के नामों की अध्यक्ष ने घोषणा की थी। चर्चा में हिस्सा लेने के लिए नामित इन विधायक के नामों से सिर्फ गुरुज्योंति और नुरुल ही अपनी बातें रख पाए। भाजपा विधायक अंगुरलता और अन्य एक विधायक नदारद ही रहे।