मेघालय के विधानसभा चुनाव में सिर्फ 1 दिन बचा हैं। राज्य की 59 सीटों के लिए 27 फरवरी को मतदान होगा। सभी की नजरें राजाबाला सीट पर लगी हुई है। 1978 से 2008 तक यह सीट एसटी के लिए रिजर्व थी लेकिन 2013 में यह जनरल की हो गई। राजाबाल सीट पर कुल 8 बार विधानसभा चुनाव हुए हैं। 4 बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है जबकि चार बार निर्दलीय चुनाव जीते। 

भाजपा ने यहां से सोफिओर रहमान को चुनाव मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने डॉ आजाद जमान को उम्मीदवार बनाया है। आपको बता दें कि पिछला विधानसभा चुनाव आजाद ने बतौर निर्दलीय उम्मीदवार लड़ा था। वह हार गए थे। निर्दलीय अशाहेल डी.शिरा ने आजाद को 891 वोटों से मात दी थी। शिरा को कुल 6, 572 जबकि आजाद को 5,681 वोट मिले थे। अशाहेल डी.शिरा फिर से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।

2008 में एनसीपी ने शिरा को टिकट दिया था लेकिन वह चुनाव हार गए थे। कांग्रेस के सईदुल्लाह नोंग्रुम ने उन्हें 1,662 वोटों से हराया था। सईदुल्लाह को कुल 7, 970 जबकि शिरा को 6,308 वोट मिले थे। सईदुल्लाह ने इस सीट से चार बार चुनाव लड़ा। तीन बार जीते और एक बार हारे। सईदुल्लाह ने पहली बार 1993 में जीत दर्ज की थी। तब उन्होंने बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ा था। सईदुल्लाह ने भाजपा के बीरेन हाजोंग को 2,394 वोटों से हराया था। 8 बार के विधानसभा चुनाव में यह सबसे बड़ी जीत है। सईदुल्लाह को कुल 6,225 जबकि हाजोंग को 3, 831 वोट मिले थे। 1998 में सईदुल्लाह नोंग्रुम ने यूडीपी के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन हार गए।

उन्हें कांग्रेस के कपिन सीएच बोरो ने 129 वोटों से हराया था। बोरो को कुल 6,620 जबकि सईदुल्लाह को 6,491 वोट मिले थे। 2003 में सईदुल्लाह ने फिर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत गए। तब उन्होंने एनसीपी के क्लिमेंट मराक को 214 वोटों से मात दी थी। सईदुल्लाह को कुल 7, 125 जबकि मराक को 6,911 वोट मिले थे। 2008 में कांग्रेस ने फिर सईदुल्लाह को चुनाव मैदान में उतारा। सईदुल्लाह फिर चुनाव जीत गए। इस बार उन्होंने एनसीपी के अशाहेल डी.शिरा को 1,662 वोटों से हराया। सईदुल्लाह को कुल 7,970 जबकि शिरा को 6,308 वोट मिले। एनपीपी ने राजाबाला से डॉ मिजानुर रहमान काजी को चुनाव मैदान में उतारा है। दो और निर्दलीय इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। वे हैं अबदुस सलेह और जिबावार्ड एन.संगमा।

राजाबाला सीट पर पहली बार विधानसभा चुनाव 1978 में हुए। तब निर्दलीय मोजिबुर रहमान ने जीत दर्ज की थी। हालांकि वह सिर्फ 19 वोटों से जीते थे। रहमान ने कांग्रेस के मोहम्मद खुरसेदुर खान को हराया था। रहमान को कुल 2,896 जबकि खान को 2, 877 वोट मिले थे। 1983 में मोजिबुर रहमान चुनाव हार गए। कांग्रेस के मोहम्मद मोहम्मद खोरसेदुर रहममा खान ने मोजिबुर को 561 वोटों से हराया। खान को कुल 3,129 जबकि रहमान को 2,568 वोट मिले। 1988 में यहां से निर्दलीय मिरियाम डी.शिरा ने चुनाव जीता। उन्होंने निर्दलीय शिबेन्द्र नारायण कोच को 813 वोटों से हराया। शिरा को कुल 3, 459 जबकि कोच को 2, 646 वोट मिले।