दिल्ली के बाद भारत का पूर्वोत्तर राज्य मेघालय एकबार फिर से दंगों के दौर से गुजर रहा है। राज्य के 6 जिलों में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद स्थिति हिंसक हो गई। हालात यहां तक बिगड़ गए कि 3 लोगों की हत्या हो गई। इसके बाद राज्य के बड़े हिस्से से इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर बैन लगा दिया गया था। इतना ही नहीं बल्कि हिंसा प्रभावित इलाकों में कर्फ्यू तक लागू करना पड़ा है। हालांकि अब 5 दिन बाद हालात में सुधार के बाद 6 जिलों से इंटरनेट और मोबाइल से बैन हटा लिया गया है।

इसलिए भड़का दंगा

हाल ही में भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के पास मेघालय के इचागढ़ में CAA के खिलाफ एक रैली बुलाई गई थी। इस रैली में मेघालय में इनर लाइन परमिट लागू करने की मांग की जा रही थी। रैली के बाद खासी स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) और गैर आदिवासियों के बीच हिंसक झड़प हो गई। शुक्रवार को एक टैक्सी ड्राइवर की ईस्ट खासी हिल जिले के इचामाटी इलाके में हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा कुछ अज्ञात लोगों ने शिलांग के व्यस्त बाजार में कुछ लोगों को छुरा घोंप दिया था। इसमें 2 लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही हिंसा में मरने वालों की संख्या 3 हो गई।

यह है विवाद

मेघालय के लोग कई सालों से राज्य के मूल समुदायों के हितों की रक्षा के लिए इनर लाइन परमिट कानून की मांग कर रहे हैं। केंद्र की ओर से नागरिकता संशोधन कानून पास करने के बाद राज्य में आईएलपी की मांग में तेजी आ गई। यहां की स्थानीय जनजातियों का मानना है कि CAA की वजह से मेघालय में आए गैर स्थानीय लोग हमेशा के लिए यहीं के होकर रह जाएंगे। इस वजह से यहां की सामाजिक व्यवस्था और जननांकीय प्रभाव पर इसका असर पड़ेगा। पिछले शुक्रवार को इसी आईएलपी की मांग को लेकर खासी स्टूडेंट्स यूनियन ने रैली आयोजित की थी। इसी रैली के बाद ही खासी समुदाय और गैर आदिवासियों के बीच हिंसा भड़की।

ये है इनरलाइन परमिट

इनरलाइन परमिट ब्रिटिश सरकार द्वारा शुरू की गई व्यवस्था है। इनर लाइन परमिट ईस्टर्न फ्रंटियर विनियम 1873 के अंतर्गत जारी किया जाने वाला एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है। ये वो परमिट है जो कुछ राज्यों में जाने के लिए बनवाना होता है। अगर मेघालय में ये व्यवस्था लागू होती है तो वहां नौकरी करने के लिए जाएं या फिर घूमने के लिए, इसके पहले आपको भारत सरकार से एक आदेश लेना पड़ेगा।

घुसपैठ का अंदेशा भी कारण

असम में नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजंस की सूची से 19 लाख लोगों को बाहर कर दिया गया है। इसके बाद मेघालय  सरकार और स्थानीय लोगों को घुसपैठ का अंदेशा होने लगा। इस चिंता को जाहिर करते हुए राज्य की विधानसभा ने दिसंबर में एक प्रस्ताव पारित कर आईएलपी लागू करने की मांग उठाई। मेघालय सरकार का ये प्रस्ताव अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के पास लंबित है। इससे यहां के लोगों का असंतोष गहराता जा रहा है।

मेघालय छठी अनुसूची के तहत आने के कारण वहां पर CAA लागू भी नहीं हो रहा है। हालांकि मेघालय में ILP की मांग कर रहे लोगों को इससे संतोष नहीं है। उनकी मांग है कि बाहरी आबादी को आने से रोकने के लिए राज्य में ILP लागू किया जाए। इस वक्त पूर्वोत्तर के राज्य अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर और मिजोरम में ILP लागू है।

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