मेघालय और नागालैण्ड की सरकारें सुप्रीम कोर्ट के 2014 में दिए गए फैसले का उल्लंघन कर रही है। दोनों सरकारों ने अभी तक ट्रांसजेंडर्स को कानूनी पहचान नहीं दी है। 2014 के फैसले के मुताबिक केन्द्र और राज्य सरकारों को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि वे 6 महीने में सिफारिशें लागू करें। 15 अक्टूबर 2015 तक सभी को सिफारिशें लागू करनी थी। एएमएएनए के सचिव शांता खुराई ने बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के नागालैण्ड और मेघालय सहित कई राज्यों ने अभी तक सुप्रीम कोर्ट की सिफारिशों को लागू नहीं किया है। 

खुराई का दावा है कि वह क्षेत्र के पहले शख्स हैं जिन्हें ट्रांसजेंडर कैटेगरी के तहत पासपोर्ट,आधार कार्ड,वोटर आईडी मिली है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मणिपुर और ओडिशा सहित कुछ ही राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन किया है। मणिपुर की सरकार ने अगस्त 2016 में राज्य के 3 हजार ट्रांसजेंडर्स के कल्याण के लिए ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड गठित किया था। एएमएनए और एएएटीएचआई ने ट्रांसजेंडर्स के अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता(सुप्रीम कोर्ट के फैसले की लाइन के मुताबिक) के लिए स्टेट लेवल वर्कशॉप  आयोजित की थी। इसमें मेघालय स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी से जुड़े 23 लीगल सर्विस प्रोवाइडर्स ने हिस्सा लिया था। 

इसके अलावा वर्कशॉप में शिक्षा,स्वास्थ्य,कानून और गृह विभाग से जुड़े प्रतिनिधी भी शामिल हुए थे। वर्कशॉप में ट्रांसजेंडर्स समुदाय से जुड़े सदस्यों ने भी हिस्सा लिया। खास बात यह रही कि सरकारी विभागों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में जानकारी ही नहीं थी। एसएएटीएचआई के सीनियर प्रोग्राम मैनेजर बिस्व भुषण पटनायक ने कहा कि वे मेघालय में टीजीडब्ल्यूबी स्थापित करने की संभावनाओं को पाने की कोशिश कर रहे हैं,जो सिफारिशों को लागू करने की बॉडी के रूप में काम कर सके। 

एमएएनए और एसएएटीएचआई के मुताबिक इस वक्त प्रत्येक सेक्टर में ट्रांसजेंडर्स के साथ भेदभाव होता है। पटनायक ने कहा कि मेघालय में ट्रांसजेंडर्स की आबादी को लेकर अभी तक प्रोपर सर्वे नहीं हुआ है। हम सरकार से मांग करते हैं कि इस तरह की एक्सरसाइज शुरू करें क्योंकि छिपी हुई आबादी बहुत ज्यादा है। वहीं मेघालय स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी ने आश्वासन दिया है कि वह प्राथमिकता के आधार पर मसले को उठाएगा। साथ ही ट्रांसजेंडर्स व उनके अधिकारों से जुड़े मसलों के प्रति जनता में जागरुकता के लिए रणनीति बनाएगा।

 एएसएलएसए  के अधिकारी डब्ल्यू डिएंगदोह ने वर्कशॉप के दौरान कहा कि मेघालय स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी जेंडर आइडेंटिटी चेंज को दिलाने के लिए समुदाय के सदस्यों के समर्थन के लिए रास्तों को तलाश करेंगे। अन्य सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों ने भी आश्वासन दिया कि वे उच्च अथॉरिटीज के समक्ष मामले को उठाएंगे और अपने विभागों के स्तर पर जरूरी कार्रवाई करेंगे।