मेघालय विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार का शोर रविवार को थम गया है। राज्य में 59 सीटों के लिए 27 फरवरी को मतदान होने हैं आैर इस विधानसभा चुनाव में सभी की नजरें मैरंग सीट पर जो कि एसटी के लिए रिज़र्व है।

मैरंग सीट पर अब तक 9 बार चुनाव हुए हैं जिसमें से हमेशा से मुकाबला कांग्रेस और यूडीपी के बीच रहा है जिसमें 3 बार कांग्रेस और 2 बार यूडीपी ने जीत दर्ज की है. चलिए बताते हैं आपको मैरंग सीट की राजनीतिक सफर की तो सबसे पहले इस सीट पर 1972 में चुनाव हुए जिसमें आईएनडी ने वाई फुल्लेर लिंगदोह मवनै ने चुनाव लड़ा और 2009  वोटों से चुनाव जीता जिसके बाद वाई फुल्लेर ने इस सीट पर एचपीडी पार्टी से हाथ मिला लिया और दुबारा 1978 में मैरंग सीट से चुनावी पर्चा भरा और जीत हासिल 1668 वोटों से जीत हासिल की।


1983 में पासा पलट गया और मैरंग सीट पर फुल्लेर लिंगदोह मवनै को हार का सामना करना पड़ा और एएचएल के किटडोर सईएम को जनता ने 1889 वोटों से जीत  का ताज पहनाया लेकिन 1988 में फुल्लेर लिंगदोह फिर से वापसी की और किटडोर सईएम को 559 वोटों से मात दी, लेकिन  1993 में जीत का रुख बदला और जनता ने आईएनडी छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए किटडोर सईएम को फुल्लेर लिंगदोह के मुकाबले 3271 वोट देखर विजयी बनाया। इसके बाद 1998 में भी जनता ने किटडोर सईएमपर ही विश्वास दिखाया और उन्हें फिर से फुल्लेर लिंगदोह के मुकाबले में 1290 वोटों से विजेता बनाया।


2003 में कांग्रेस ने इस सीट पर अपने नए उम्मीदवार बोल्डनेस एल नोंग्रुम को चुनावी मैदान में उतरा और इस बार भी मुकाबला एचपीडीपी के फुल्लेर लिंगदोह  दे था लेकिन कांग्रेस की लहर थी और जनता ने बोल्डनेस को 798 वोट देकर विजयी बनाया। किन्तु यह सिलसिला आगे नहीं बढ़ सका क्योंकि इसके बाद साल 2008 में जनता ने यूडीपी से चुनावी मैदान में उतरे मेतबाह लिंगदोह पर अपना विश्वास दिखाया और कांग्रेस के उम्मीदवाद बोल्डनेस को 1874 वोटों से करारी हार दी।


इसके बाद साल 2013 में कांग्रेस ने मैरंग सीट अपनी महिला उम्मीदवार यूरेका एफ. पी लिंगदोह को उतरा लेकिन जनता ने फिर से यूडीपी के नेता मेतबाह लिंगदोह पर अपना विश्वास दिखाया और उन्हें 1616 वोटों विजेता बनाया। लेकिन इस बार मैरंग सीट पर मुकाबला कड़ा है क्योंकि मेघालय राजनीति में दूर दूर तक नजर नहीं आने वाली बीजेपी ने केस्टोनबेल मानिक सीईएमलीह को टिकट दिया है तो वहीं कांग्रेस ने यूरेका एफ पी लिंगदोह को इस सीट पर उतरा है यूडीपी ने अपने पूराने खिलाडी और विजेता मेतबाह लिंगदोह को टिकट दिया है इसके साथ ही एनपीपी ने लावनपैंशनगैन के. वॉर को तो पीडीएफ ने कॉउंसललर सिंह वहलंग को मैरंग सीट से उतारा है ।

मेघालय चुनाव की सरगर्मी आप इसी से तय कर सकते हैं कि इस बार राज्य के चुनाव पर ना सिर्फ राजनीतिक पार्टियों बल्कि जनता समेत मीडिया की भी पैनी नजर बनी हुई है।  इस बार के चुनाव कई नई चुनावी दास्तां लिखने वाले हैं एक तरफ मेघालय चुनाव कांग्रेस के लिए साख बचाने का सवाल बन गया है तो वहीँ दूसरी ओर बीजेपी सपने ऊपर से पूर्वोत्तर में जमानत जब्त का ठप्पा हटाने में जुटी हुई है, असम से शुरू हुआ बीजेपी का जीत का सफर और त्रिपुरा मेघालय और नागालैंड की जीत के साथ पूरा करना चाहती है।