उत्तरपूर्व के तीन राज्यों में से एक मेघालय में कांग्रेस की नौ साल पुरानी कांग्रेस फिर से बहुमत नहीं मिलने के कारण सत्ता से बाहर हो गई है। कांग्रेस  ने श्रेष्ठ रणनीतिकारों को मेघालय में झोंक दिया है, लेकिन इसके बावजूद पार्टी को आस नहीं है कि वह वहां सरकार बना पाएगी, इसलिए पार्टी की प्राथमिकता है कि उसके जीत हासिल करने वाले विधायकों को टूटने नहीं दिया जाए और उन्हें दूसरे दलों की बुरी नजर से बचाया जाए।

कांग्रेस ने मेघालय में चुनाव रुझान आने के साथ ही यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल और पूर्वोत्तर मामलों के जानकार महासचिव मुकुल वासनिक को शिलांग भेज दिया और वे वहां पहले से मौजूद पूर्वोत्तर के प्रभारी महासचिव सी पी जोशी तथा कमलनाथ के साथ मिलकर सहयोगी दलों से बातचीत में जुट गए। पार्टी नेता छह विधायकों वाले यूडीपी के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं, लेकिन बताया जा रहा है कि इनकी कई शर्त कांग्रेस ने शुरुआत में ही ठुकरा दी और कहा कि सरकार बनने के बाद सत्ता में हिस्सेदारी तय की जा सकती है। हाईकमान चाहता है कि किसी भी कीमत पर मेघालय में सरकार बननी चाहिए।