मेघालय की राज्य विधानसभा में कोनराड संगमा सरकार ने आसानी से विश्वास मत हासिल कर लिया। विश्वास प्रस्ताव के समर्थन में कुल 35 वोट पड़े, जबकि इसके खिलाफ  20 वोट पड़े। एक वोट अवैध करार दिया गया, जबकि एक विधायक अनुपस्थित रहे। विधानसभा के अस्थायी अध्यक्ष ने वोट नहीं डाला। विपक्षी के नेता मुकुल संगमा ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों पर जीत दर्ज की थी।


नवनियुक्त विधानसभा अध्यक्ष दोनकुपर राय मत के लिए विश्वास प्रस्ताव को सदन के सामने रखने जा रहे थे कि विपक्षी नेता मुकुल संगमा अपनी जगह से खड़े हुए और पूछा कि कौन सी पार्टी सरकार की अगुवाई कर रही है। कांग्रेस नेता ने कहा कि हम यह जानना चाहते हैं कि यह एनपीपी नीति सरकार है या बीजेपी नीति सरकार है या पार्टियों का समूह है। मुकुल ने कहा कि यह निश्चित ही खंडित जनादेश है। पूरे चुनावी अभियान को देखें तो लोगों का जनादेश यहां गैर बीजेपी सरकार बनाने का था।


सदन को सूचित करते हुए कोनराड ने कहा कि वह एनपीपी की अगुवाई वाली मेघालय डेमोक्रेटिक एलायंस सरकार के प्रमुख हैं और उनके पास युनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी, हिल स्टेट पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट और निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल है। उन्होंने हालांकि बीजेपी का नाम नहीं लिया, जबकि बीजेपी के मंत्री अलेक्जेंद्र हेक और विधायक सनबोर शुल्लाई ने सरकार का साथी होने पर पार्टी का बचाव किया। शुल्लाई को यह कहते हुए सुना गया कि भाजपा एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी है और जनविरोधी नहीं है।


बता दें कि चुनाव में कांग्रेस 21 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई थी, लेकिन यह संख्या सरकार गठन के लिए पर्याप्त नहीं है। एनपीपी 19 सीट जीतकर दूसरे स्थान पर रही थी। उसे छह दलों से समर्थन मिला और उसके नेतृत्व में सरकार बनी, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (6), पीपुल डेमोक्रेटिक फ्रंट (4), हिल स्टेट पीपुल डेमोक्रेटिक पार्टी (2), भाजपा (2) और एनसीपी (1) के अलावा दो निर्दलीय भी शामिल हैं। गौरतलब है कि 60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा की 59 सीटों पर ही चुनाव हुआ था क्योंकि एक उम्मीदवार की हत्या हो गई थी।