नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के अध्यक्ष कोनराड संगमा मेघालय के 12 वें मुख्यमंत्री के रूप में आज पद और गोपनीयता की शपथ ली।  गौरतलब है कि एनपीपी की अगुवाई में बन रही सरकार में बीजेपी भी हिस्सेदार है। इस दौरान शपथ कार्यक्रम में गृहमंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे। सीएम संगमा के अलावा 6 अन्य विधायकों को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। 6 मंत्रियों में एनपीपी के दो (प्रिसटन तिनसांग और जेम्स संगमा) और बीजेपी के एक (एएल हेक) शामिल हैं। 


जानिए कौन हैं कोनराड संगमा

कोरनाड संगमा मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा के अध्यक्षए पीए ए संगमा के पुत्र हैं। उनकी बहन अगाथा 15वीं लोकसभा की सदस्य और पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री राज्य मंत्री रही हैं, जबकि उनके भाई जेम्स संगमा मेघालय विधान सभा में विपक्ष के चीफ  व्हीप हैं। 40 साल के कोनराड संगमा को इस तरह राजनीति विरासत में मिली है। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने 1990 में अपने पिता के कैंपेन मैनेजर के रूप में अपना करियर शुरू किया था।

2008 में वह मेघालय के सबसे कम उम्र के वित्त मंत्री बने। वित्त मंत्री बनने के 10 दिन बाद ही उन्होंने बजट पेश किया था। कोनराड वर्तमान में तुरा संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से सांसद हैं।  अपने पिता पीए संगमा की मौत के बाद उन्होंने इस सीट पर जीत दर्ज की थी। 2009-2013 तक कोनराड संगमा मेघालय विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे। कॉनराड ने लंदन विश्वविद्यालय और पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और उनकी स्कूली पढ़ाई दिल्ली के सेंट कोलंबस स्कूल से हुई।

संगमा के मुख्यमंत्री बनते ही गठबंधन में विरोध शुरु

इस बीच संगमा को मुख्यमंत्री पद के लिए चुने जाने को लेकर गठबंधन में विरोध शुरू हो गया है। एनपीपी नीत गठबंधन मेघालय डेमोक्रटिक एलायंस के सहयोगी दल हिल स्टेट पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (एचएसपीडीपी) गठबंधन के अन्य सहयोगी दल यूनाइटेड डेमोक्रेटक पार्टी (यूडीएफ) से इसलिए नाराज हैं कि उसने संगमा को मुख्यमंत्री बनाये जाने की सिफारिश की।


उसका आरोप है कि संगमा 60 सदस्यीय विधान सभा के निर्वाचित सदस्य नहीं हैं। एचसीपीडीपी के मुखिया ए मिलर वासियावमोइट ने संगमा को मुख्यमंत्री के रूप में अस्वीकार करते हुए पत्राकारों से कहा कि हमारी पार्टी एनपीपी के नवनिर्वाचित विधायक प्रोस्टोन तिंसोंग को मुख्यमंत्री बनाये जाने के पक्ष में है। पूरी तरह से क्षेत्रीय दल के सरकार बनाने समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ऐसे किसी सरकार को स्वीकार नहीं करेगी, जिसमें कांग्रेस अथवा भाजपा शामिल है।

उल्लेखनीय है कि राज्यपाल गंगा प्रसाद ने सबसे बड़े दल को विधान सभा में बहुमत साबित करने का मौका दिये जाने के कांग्रेस के आग्रह के बीच एनपीपी अध्यक्ष को छह मार्च को नयी सरकार बनाने का कल न्यौता दिया था। संगमा ने राज्यपाल से मिलकर राज्य में नयी सरकार बनाने का दावा पेश किया था। साठ सदस्यों वाली विधानसभा में उन्होंने 34 विधायकों के समर्थन का दावा किया था। इनमें एनपीपी के 19, यूडीपी के छह, एचएसपीडीपी और भारतीय जनता पार्टी के दो-दो , पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट के चार विधायक शामिल हैं। इस गठबंधन को एक निर्दलीय विधायक का भी समर्थन है।


कांग्रेस नेता कमल नाथ और अहमद पटेल ने शनिवार को शिलांग का दौरा करके क्षेत्रीय दलों से गठबंधन करने की कोशिश की थी, लेकिन उनका प्रयास सफल नहीं हो सका। कांग्रेस 21 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी जबकि एनपीपी के खाते में 19 सीटें आई। इस राज्य में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी। इस बार 59 सीटों के लिए 372 उम्मीदवार मैदान में थे। मतदान 27 फरवरी को हुआ था। विलियमनगर सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के उम्मीदवार जोनाथन संगमा की 18 फरवरी को ईस्ट गारो हिल्स जिले में आईईडी विस्फोट में मौत के बाद इस सीट पर मतदान रद्द कर दिया गया था।