मेघालय से आये कलाकारों ने अवध शिल्प ग्राम में चल रहे उत्तर प्रदेश दिवस और लखनऊ महोत्सव में गुरुवार को जबरदस्त रौनक कायम कर दी।

दिन में प्रदेश भर की विलुप्त होती संस्कृतियों से दर्शक रू-ब-रू हुए। देर रात तक चले कार्यक्रमों में विभिन्न लोककलाओं का दर्शकों ने आनंद लिया। इसके साथ ही पारम्परिक जायकों के साथ झूलों और शॉपिंग का भी दौर चलता रहा।


सांस्कृतिक पंडाल पर प्रदेशभर से आए जनजातिय कलाकारों ने विलुप्त होते पारम्परिक नृत्यों को पेश किया गया तो वहीं मेघालय के शाद ए मस्तीह ग्रुप ने लोकनृत्य से जमकर वाहवाही पाई। इसके साथ ही आजमगढ़ के उमेश कनौजिया की टीम ने धोबिया नृत्य में सीता स्वयंवर पेश किया। इसके साथ नागड़ा, मृदंग, कसौर, ढफली, ढोलक, रमतुला और झांझ जैसे वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति भी शानदार रही।

झांसी के लोक कलाकार निशांत भदौरिया की टीम ने राई नृत्य पर वाहवाही पाई। बांदा के रमेश पाल की टीम ने श्रीकृष्ण बाल लीलाओं की जीवंत प्रस्तुति दी। वहीं, अयोध्या के मुकेश कुमार और साथियों ने फरुआही नृत्य में अवधी रामलीला प्रस्तुत की। वहीं प्रदेश की लोक कलाओं के साथ विभिन्न प्रांतों से आए कलाकारों ने भी लोकरंग पेश किए। हरियाणा के मनोज जाले की टीम ने घूमर और बम लहरी नृत्य, मध्य प्रदेश के दीपेश पांडेय की टीम ने बधाई व नौरता नृत्य, राजस्थान के रुप सिंह कंजर की टीम ने चकरी, खरी और घूमर, उत्तराखंड के हनुमंत सिंह ने साथियों संग छबैली, घसियारी गायन नृत्य पेश किया। इसी तरह बिहार के लोक कलाकारों ने झिझिया व सोहर, मथुरा के कलाकारों ने मयूर नृत्य पेश किया।