राजधानी दिल्ली में गर्मी के दिनों में बिजली की डिमांड पूरे करने और बिजली कटौती से निपटने के लिए मेघालय और सिक्किम से बिजली ली जाएगी। इसके लिए (बॉम्बे सबरबन इलेक्ट्रिक सप्लाई) बीएसईएस की राजधानी पावर लिमिटेड और यमुना पावर लिमिटेड कंपनी ने अन्य राज्यों से बिजली लेने की तैयारी तेज कर दी है। इस बार बिजली की पीक डिमांड 7400 मेगावाट के पार जाने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 7016 मेगावाट थी।


बीएसईएस ने 42 लाख उपभोक्ताओं को गर्मियों में बेहतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बिजली की अनुमानित मांग के हिसाब से उसकी पूरी व्यवस्था कर ली है। एनटीपीसी और दिल्ली के पावर प्लांटों से मिलने वाली बिजली के अलावा बीएसईएस ने हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, मेघालय और सिक्किम से भी लंबी अवधि के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट व पावर बैंकिंग अरेंजमेंट्स किया है।


बिजली बीएस ईएस के प्रवक्ता ने बताया कि अप्रैल 2019 से 100 मेगावाट विंड पावर भी मिलनी शुरू हो जाएगी। अप्रत्याशित कारणों से बिजली की मांग में और भी इजाफा होता है तो डिस्कॉंम शॉर्ट टर्म आधार पर पावर एक्सचेंज से बिजली खरीदेगी।


पावर बैंकिंग वह सिस्टम है, जिसके तहत दिल्ली की बिजली कंपनियां सर्दियों के दौरान ठंडे प्रदेशों को बिजली देती हैं और ठंडे प्रदेश उतनी ही बिजली गर्मियों में दिल्ली की बिजली कंपनी को वापस कर देते हैं। मुंबई और चेन्नई के कुल पीक डिमांड दिल्ली से कम दिल्ली में बिजली की मांग प्रतिवर्ष तेजी से बढ़ रहा है। इसका कारण दिल्ली का मौसम है।


बिजली कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि मुंबई और चेन्नई की कुल पीक डिमांड को अगर मिला लें तो भी वह दिल्ली की पीक डिमांड से कम है। ऐसे में सुचारू बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बीएस ईएस ने बड़े पैमाने पर अपने नेटवर्क का सशक्तिकरण और आधुनिकीकरण किया है।


साथ बढ़ती डिमांड के चलते अपडेट करने का काम भी बिजली कंपनियां कर रही है। इसमें मौसम का अनुमान लगाने वाली तकनीक शामिल है। इसमें लोड का सटीक अनुमान लगाने तापमान, बारिश, बादल और उमस की जानकारी का आधुनिक तकनीक के उपकरण से जानकारी जुटा कर काम किया जा रहा है।