इस्लामिक कट्टरता पर नजर रखने के लिए पूर्वोत्तर के राज्य आपस में समन्वय बना रहे हैं। बता दें कि पिछले दिनों शिलॉन्ग में भड़की हिंसा के बाद पूर्वोत्तर के राज्य चौकन्ना हो गए हैं। दरअसल शिलांग हिंसा के लिए राज्य से बाहरी लोगों का शामिल होने की बात पहले ही साबित हो चुकी थी। खुद राज्य के सीएम कोनराड संगमा ने स्वीकार था कि इस हिंसा को बाहरी लोगों ने भड़काया है। 

वहीँ अब पूर्वोत्तर के राज्यों ने अपने राज्यों में कथित इस्लामिक कट्टरपंथियों की गतिविधियों पर नजर रखने काम कर रही है। यहां एक कार्यक्रम के दौरान मेघालय राज्य के डीजीपी एसबी सिंह ने कहा कि हम इस तरह के मामलों को सामने ला चुके हैं। इसलिए हमें और सतर्क रहना होगा। हालांकि उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी कि किस प्रकार की नजर रखी जा रही है। 

दरअसल शिलॉन्ग में भड़की हिंसा के पीछे बाहरी लोगों का हाथ था, जिसके चलते शहर कई दिनों तक सुलगता रहा।  वहीं अब मेघालय और असम सरकार समन्वय बना रही हैं जिससे राज्यों में ऐसा आतंक दोबारा न देखने को मिले। इसके लिए इस्लामिक कट्टरपंथियों पर नजर रखने जा जाएगी। इसबात को लेकर दो राज्यों के सीएम ने सहमती जताई है, जिसमें असम और मेघालय शामिल है। 

पिछले दिनों  मेघालय के दौरे के समय असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा था कि राज्य में इस्लामी कट्टरपंथियों का विस्तार तेजी से बढ़ रहा है, जो कि राज्यों की सुरक्षा के लिए बढ़ा खतरा बन सकते हैं। पूर्वोत्तर में एक पार्टी भी सक्रिय हो रही है, जोकि आतंकियों का समर्थन करती है और भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहती है! ऐसे में पूर्वोत्तर के राज्यों पर भी इस्लामिक कट्टरता की आड़ में आतंकी खतरा लगातार बढ़ रहा है।