कोहिमा। ये हैं तोलिहो चिशी। ये नागालैण्ड की पहली महिला ऑटो ड्राइवर है। जब तोलिहो ने ऑटो रिक्शा चलाना शुरू किया तो परिवार के लोगों और दोस्तों ने सोचा कि उसका दिमाग खराब हो गया है। उन्होंने तोलिहो से कहा, यह पुरुषों की जॉब है और लड़कियां ऑटो रिक्शा नहीं चलाती लेकिन तोलिहो पर इन तानों का कोई असर नहीं हुआ। वह अपने फैसले पर अडिग रही। 

उसका भरोसा था कि लड़कियां भी कोई भी काम कर सकती है। इसी विश्वास के कारण तोलिहो ऑटो ड्राइवर बन गई। तोलिहो जो ऑटो रिक्शा चलाती है वह उसे मां ने गिफ्ट किया था। वह अपने परिवार में कमाने वाली एक मात्र सदस्य है। पहली नागा (महिला)ऑटो रिक्शा ड्राइवर तोलिहो का कहना है कि मैं अपनी जिंदगी गुजर बसर करने और अपने परिवार को सपोर्ट करने के लिए ये कर रही हूं। मुझे कुछ साबित नहीं करना है। मुझे ऑटो रिक्शा चलाने में कोई शर्मिंदगी महसूस नहीं होती। 

तोलिहो को पुरुष ऑटो ड्राइवरों से भी जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। तोलिहो बड़े गर्व से लोगों को चार मील जंक्शन से दिमापुर के ओल्ड शोउबा तक ले जाती है। तोलिहो बोल्ड,चीयरफुल और मस्तमौला महिला है। उसने स्कूल में ही ड्राइव करना सीख लिया था। बकौल तोलिहो, मैंने पहले स्कूटर चलाना सीखा। इसके बाद ऑटो रिक्शा। अब मैं बस को छोड़कर हर व्हीकल ड्राइव कर सकती हूं। जॉब के पहले दिन पुरुष ऑटो ड्राइवरों ने उससे कहा,लेडिज फस्र्ट। उन्होंने तोलिहो को ज्यादातर पैसेंजर्स दे दिए। 

यात्री,खासतौर पर महिला यात्री उसे उत्साहित कर रही हैं। कई तो उसे ज्यादा किराया दे देती हैं। तोलिहो ने पहले दिन 470 रुपए कमाए। उसने अपनी पहली कमाई मां को दे दी। तोहिलो अपने दिन की शुुरुआत सुबह 7.30 बजे करती है। वह सबसे पहले स्कूली बच्चों को ड्रॉप करती है। इसके बाद ऑटो रिक्शा पार्किंग लाइन की ओर बढ़ती है,जहां वह अपने डेली रूटीन की शुरुआत करती है। वह हर रोज औसतन 15 ट्रिप्स करती है और शाम 7 बजे तक काम करती है। उसकी एथलेटिक फिजिक उसे ऑटो रिक्शा को किक स्टार्ट के लिए जरूरी मजबूती प्रदान करती है। 

ज्यादातर महिलाएं उसके ऑटो रिक्शा में बैठना पसंद करती है। इसको लेकर पुरुष ऑटो ड्राइवर मजाक भी करते हैं कि यात्रियों को मत चुरा। बकौल तोलिहो, निश्चित रूप से सभी के लिए बहुत सारे पैसेंजर्स हैं लेकिन उन्हें मेरी टांग खिंचाई पसंद है। कुछ तो उसे चिढ़ाने के लिए भाई भी कहते हैं। जब तोलिहो 8 वीं क्लास में थी तब उसने स्कूल छोड़ दिया और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया को ज्वाइन कर दिया। तोलिहो एथलेटिक्स में प्रशिक्षित है। हालांकि उसने एक साल बाद ही एकेडमी छोड़ दी और वह अपने घर चली गई क्योंकि वह अपनी मां के बगैर नहीं रह सकती थी। 

बकौल तोलिहो,मेरे पिता का स्वर्गवास हो गया। तब मैं परिवार में सबसे बड़ी थी। मुझे अपनी मां से बहुत लगाव है। तोलिहो ने केवल अच्छी ड्राइवर है। वह अच्छी पेंटर भी है। वह ड्रम्स प्ले करती है।  वह अपनी कमाई का कुछ हिस्सा चर्च और गरीबों क ोदेती है। तोलिहो का कहना है कि अगर मैं यह कर सकती हूं तो अन्य लड़कियां भी कर सकती है। मेरे कहने का मतलब यह नहीं है कि वे ड्राइवर ही बनें लेकिन अपनी जिंदगी चलाने के लिए ईमानदारी से पैसा कमाने में शर्म नहीं आनी चाहिए।