देश भर में जहां लोग सांस की लड़ाई लड़ रहे अपने करीबियों और रिश्तेदारों के लिए ऑक्सीजन पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं । इसी समय एक तिरुपुर का एक नेक डॉकटर अपने कार्य की वजह से चर्चा में है। डॉ शक्तिवेल पिछले कई वर्षों से दक्षिण भारत की कपड़ा राजधानी, तिरुपुर में एक मल्टी स्पेशलिटी नर्सिंग होम, ‘शक्ति अस्पताल’ चला रहे हैं। पेशे से एक सामान्य चिकित्सक, डॉ शक्तिवेल लोगों की भलाई के लिए तत्पर थे। इसी को देखते हुए उन्होंने ऑक्सीजन के लिए इधर-उधर भटकने वालों के लिए अपने अस्पताल परिसर में ही ‘ऑक्सीजन पंडाल’ स्थापित करने का निर्णय लिया।

तिरुपुर में एक 80 वर्षीय महिला सांसों के लिए जद्दोजहद कर रही थी और उसके रिश्तेदार को कहीं बेड नहीं मिला। उसके बाद उन्हें शक्ति अस्पताल के बारे में पता चला और वे आधीरात के बाद यहां आए और महिला को ऑक्सीजन वाला बेड उपलब्ध हो सका और उसकी जान बच सकी। यह उन कई मामलों में से एक है, जो दक्षिण भारत के कपड़ा शहर में देखा जा रहा है, जिसका उल्लेख अक्सर दक्षिण के मैनचेस्टर के रूप में किया जाता है और कोविड से पीडि़त कई रोगी ऑक्सीजन पंडाल से लाभ पा रहे हैं।

डॉ. शक्तिवेल ने कहा, हमारे पास एक छोटी द्रवीभूत ऑक्सीजन उत्पादन इकाई है और वहां सरप्लस ऑक्सीजन था और फिर मैंने सोचा कि क्यों न हम गुरुद्वारे के ऑक्सीजन लंगर की तर्ज पर ऑक्सीजन पंडाल खोले। वे कहते हैं, हमने अपनी कार शेड को एक ऑक्सीजन पंडाल में बदल दिया और धातु की चादरें छत के रूप में रख दी गईं और मरीजों को आराम करने और ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए पांच से छह बिस्तर स्थापित किए गए। इससे कई रोगियों को मदद मिली है। डॉ. शक्तिवेल ने कहा कि तिरुपुर में नट्टरीनाई फाउंडेशन और इसके मेंटर व व्यवसायी कृष्णन ने हमारी मदद की है और अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाने में हमारी मदद की है।

मूल रूप से एक कपड़ा निर्यातक कृष्णन ने कहा, नट्रीनई फाउंडेशन हाल ही में स्थापित किया गया था और अब हम कोविड रोगियों की सहायता के लिए जो भी समर्थन कर सकते हैं, उसका विस्तार कर रहे हैं। हमने डॉ. शक्तिवेल को उनके अस्पताल परिसर में ऑक्सीजन प्रदान करने के लिए समर्थन किया। हमने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स के लिए ऑर्डर दिया है, जिनमें से पांच बुधवार को हमारे पास पहुंचने हैं। आशा है कि यह हमें और अधिक लोगों को सहायता प्रदान करने में भी मदद करेंगे।