मध्यप्रदेश के दमोह जिले से फर्जी डिग्री प्राप्त करके जबलपुर के नामी गिरामी अस्पताल में डाक्टरी की जा रही थी, इस बात का खुलासा एसटीएफ की टीम द्वारा दमोह में पकड़े गए आरोपी ने किया है. आरोपी ने एसटीएफ को जानकारी दी कि कोरोना काल में जबलपुर के कई युवकों ने फर्जी डिग्री बनवाकर काम किया है.

बताया जाता है कि एसटीएफ की टीम ने जबलपुर के आशीष अस्पताल में पदस्थ डाक्टर नीरज साहू व लाइफ मेडीसिटी अस्पताल के डाक्टर जितेन्द्र ठाकुर को रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते हुए पकड़ा रहा, इस दौरान एसटीएफ को यह जानकारी लगी कि दोनों की डिग्री फर्जी है, मामले में पूछताछ की गई तो पता चला कि दोनों ने नरेन्द्र ठाकुर के जरिए दमोह में रवि पटैल के माध्यम से फर्जी डिग्री प्राप्त की थी, इस दोनों की डिग्री भी रवि पटैल से ही बनवाकर दी गई थी.

इसके बाद से ही एसटीएफ की टीम रवि पटैल की तलाश में रही, जिसे आज दमोह से गिरफ्तार कर लिया गया है, रवि के पास से एक कम्प्यूटर व प्रिंटर भी बरामद किया गया है. एसटीएफ को यह भी जानकारी मिली है कि रवि पटैल द्वारा 5-5 हजार रुपए में इस तरह की फर्जी डिग्रीयां बनाकर बेची जाती रही, जिससे पूछताछ में और भी कई खुलासे होने की संभावना है. रवि पटैल पथरिया जिला दमोह में एक कम्प्यूटर सेंटर में काम करता रहा, जहां से वह फर्जी डिग्री बनाकर देता रहा.