राष्ट्रीय मेडिकल आयोग (एनएमसी) ने कहा है कि विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने गये जिन छात्रों की इंटर्नशिप पूरी नहीं हो पायी है, वे अब भारत में अपनी इंटर्नशिप पूरी कर सकते हैं। हालांकि, एनएमसी ने यह स्पष्ट किया है कि छात्रों को भारत में अपनी इंटर्नशिप पूरी करने का आवेदन देने से पहले फॉरेन मेडिकल ग्रैजुएट एग्जाम (एफएमजीई) में पास होना होगा।

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एफएमजीई परीक्षा राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड द्वारा साल में दो बार आयोजित की जाती है। विदेशों से मेडिकल की पढ़ाई करके आने वाले भारतीय छात्रों को भारत में पंजीकरण कराने के लिये पहले एफएमजीई परीक्षा पास करनी पड़ती है। इस परीक्षा को पास करने के लिये तीन मौके दिये जाते हैं। एफएमजीई की परीक्षा पास करने के बाद छात्र भारत में 12 माह की इंटर्नशिप या अपने इंटर्नशिप की शेष अवधि को यहां पूरा कर सकते हैं।

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एनएमसी ने कहा है कि कोरोना महामारी और यूक्रेन की स्थिति के कारण कई मेडिकल छात्र अपनी इंटर्नशिप पूरी नहीं कर पाये हैं। इन छात्रों की तकलीफों और तनाव को देखते हुये भारत में अपनी शेष इंटर्नशिप पूरी करने की अनुमति देने का इनका आवेदन बिल्कुल सही है। आयोग जल्द ही इस विषय में राज्य मेडिकल परिषदें को निर्देश जारी करेगा। गौरतलब है कि सिर्फ वही भारतीय छात्र एफएमजीई परीक्षा को देने के योग्य होते हैं जिन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी की जाने वाली मेडिकल स्कूलों की सूची में दर्ज विदेशी मेडिकल संस्थान से पढ़ाई की हो। यूक्रेन के 34 मेडिकल संस्थानों का नाम इस सूची में शामिल है।