महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस ने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता अजित पवार के साथ मिलकर सरकार बना ली थी। शनिवार सुबह फडणवीस के मुख्यमंत्री पद और अजित पवार के उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की खबर आ गई थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया और करीब 2 दिन तक सुनवाई चलती रही। सुप्रीम कोर्ट ने 27 नवंबर शाम 5 बजे तक विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दे दिया।



सिर्फ 80 घंटे ही चल सकी फडणवीस की सरकार

महाराष्ट्र में जिस अजित पवार के बूते फिर सरकार बनाने की उड़ान भरी गई, उस अजित पवार के बड़े पवार यानी शरद पवार के आगे राजनीतिक तौर पर बेदम साबित होने के बाद फडणवीस के पास कोई और विकल्प नहीं बचा था। जिसके बाद फडणवीस ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। फडणवीस की यह सरकार सिर्फ 4 दिन (23-26 नवंबर 2019) यानी 80 घंटे ही चल सकी।

मेघालय में भी हो चुका है सियासी फेरबदल

मेघालय में भी मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी फेरबदल देखने को मिल चुका है। यहां सत्ता संग्राम साल 1998 में हुआ था और 12 दिन में ही सरकार गिर गई थी। 27 फरवरी 1998 को एमसी मारक ने मेघालय के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, लेकिन उनकी सरकार ज्यादा दिन नहीं चल पाई और 10 मार्च 1998 यानी 12 दिन में ही उनको अपने पद से इस्तीफा देने पड़ा था। ज्ञात हो कि एससी मारक कांग्रेस के नेता हैं। उन्होंने दो बार मेघालय के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है।

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