उज्जैन नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों का मई माह का वेतन रोका जा सकता है, अगर उन्होंने वैक्सीनेशन नहीं कराया तो नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने इनके लिए अजीब फरमान जारी किया है।  जिन लोगों ने वैक्सीनेशन का पहला या दूसरा डोज ले लिया है, उनका वेतन नहीं रोका जाएगा। 

उज्जैन नगर निगम के कमिश्नर क्षितिज सिंघल का कहना है कि राज्य और केंद्र सरकार ने दूसरे चरण में निगम के कर्मचारियों को फ्रंट लाइन वर्कर माना था।  उनके सौ फीसदी वैक्सीनेशन के आदेश दिए थे।  लेकिन, उज्जैन नगर निगम के करीब 1600 कर्मचारियों में से मात्र 70 प्रतिशत कर्मचारियों ने ही अभी तक वैक्सीन लगवाई है। 

 उन्होंने कहा कि इसमें कुछ अधिकारी भी शामिल हैं।  इन कर्मचारियों की लापरवाही को देखते हुए ये नया आदेश निकाला गया।  मई माह की  सैलरी उन्हें ही मिलेगी जिन्होंने वैक्सीनेशन का अपना पहला या दूसरा डोज ले लिया है। 

 

उज्जैन नगर निगम कमिश्नर सिंघल का कहना है कि निगमकर्मी दिनभर जनता के बीच भीड़ वाले इलाको में काम करते हैं।  उनकी सेफ्टी के लिए वैक्सीन जरूरी है।  गौरतलब है कि सरकार ने निगम कर्मियों को फ्रंटलाइन वर्कर्स माना है, लेकिन कोरोना का टीका लगवाना उसकी तरफ से अनिवार्य नहीं किया गया है।  इसे लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से साफ कहा गया है कि वैक्सीन लगवाना पूरी तरह स्वैच्छिक है।  कोई भी शख्स वैक्सीन लगवाने के लिए बाध्य नहीं है। 

उज्जैन शहर भले ही कल से धीरे-धीरे अनलॉक हो जाएगा, लेकिन महाकाल के दर्शन अभी नहीं हो सकेंगे।  महाकालेश्वर मंदिर सहित शहर के धार्मिक स्थल बंद ही रहेंगे।  क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक में शहर को खोलने के नियमों और नीति पर चर्चा की गई।  प्रदेश  के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 19 मई को उज्जैन में शहर को अनलॉक किए जाने के संकेत दिए थे। 

 

जिले को अनलॉक करने के लिए हुई क्राइसिस मैनेजमेंट की मीटिंग में  कैबिनेट मंत्री मोहन यादव, विधायक पारस जैन और कलेक्टर आशीष सिंह सहित जिले के आला अधिकारी मौजूद थे।  बैठक में सभी ने अपने-अपने तर्क रखे और चर्चा की।  इसके बाद मीटिंग में एक जून से  शहर को शर्तों के साथ खोलने का निर्णय लिया गया।