देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों ने केंद्र और राज्य सरकारों की हालात खराब कर दी है।  मामलों में अचानक आई इस तेजी का कनेक्शन तबलीगी जमात से है। इसका मुख्य जिम्मेदार तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद कंधलावी है। साद के एक फैसले ने नई मुसीबत में लाकर खड़ा कर दिया है और अब देश कई तरह की मुश्किलों से जूझ रहा है। जानकारी मिली है कि साद ने कथित रूप से कई वरिष्ठ मौलवियों, मुस्लिम बुद्धिजीवियों की सलाह और अनुरोधों को भी नहीं सुना, जिन्होंने मार्च 2020 के निजामुद्दीन मरकज की बैठक को रद्द करने को कहा था।

लेकिन मौलाना साद के अड़ियल रवैये ने उनके ऊपर अंधविश्वास करने वाले सैकड़ों अनुयायियों का जीवन खतरे में तो डाला ही साथ ही उन्होंने कई मुस्लिम सदस्यों की छवि को भी धूमिल कर दिया है। जैसे की एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती ठीक उसी तरह से मुस्लिम समुदाय के साथ हो रहा है। मौलाना साद की एक गलती के कारण पूरे मुस्लिम समुदाय को बदनाम कर दिया है और देश को भी काफी तकलीफ दी है।  देश के सभी कोरोना मामलों का 30 फीसदी मरकज में भाग लेने वाले जमात से जुड़े हैं। जांच के दौरान ज्ञात हुआ है कि तबलीगी जमात का एक और गुट शुरा-ए-जमात है, जिसका मुख्यालय तुर्कमान गेट दिल्ली में है। उन्होंने कोरोनो वायरस के प्रकोप के तुरंत बाद सभी कार्यक्रमों को रद्द कर दिया था। जबकि मौलाना साद ने कार्यक्रम को जारी रखने के लिए जोर दिया। यहां उसने अपना प्रचार किया और 'मस्जिद में सबसे अच्छी मौत' जैसा उपदेश भी लोगों को दिया और लोग उनके बहकावे में आकर अपनी जान को खतर में डाला। और इसका हर्जाना पूरा देश भुगत रहा है।

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