नई दिल्ली। सूरज पर धरती से 3 गुना बड़ा धब्बा देखा गया है जो पृथ्वी के लिए चिंता का विषय हो सकता है। यह धब्बा पिछले 24 घंटे में दोगुना बड़ा हो गया है। इसकी वजह से अब मध्यम दर्जे का सौर तूफान आ सकता है। जिसकी वजह से वैज्ञानिक परेशान हैं। क्योंकि अगर सौर तूफान आया तो कई सैटेलाइट प्रभावित हो सकते हैं। जीपीएस, टीवी संचार और रेडियो का काम बाधित हो सकता है। SpaceWeather.com के लेखक टोनी फिलिप्स ने लिखा की तेजी से बढ़ने वाले इस धब्बे का आकार केवल 24 घंटों में दोगुना हो गया है। इससे पृथ्वी की मैग्नेटिक फील्ड पर असर पड़ सकता है। धब्बे की वजह से धरती के दोनों ध्रुवों पर रंगीन रोशनी वाला अरोरा देखने को मिल सकता है। 

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उन्होंने कहा कि यह धब्बा अगर सौर तूफान पैदा करता है तो वह कम से कम M Class का होगा। इन दिनों सूरज काफी सक्रिय रहा है। इस वजह से जियोमैग्रेटिक तूफान आ रहे हैं। जिसे वैज्ञानिक भाषा में एम-क्लास और एक्स-क्लास के फ्लेयर्स बोलते हैं। यह सबसे मजबूत वर्ग की फ्लेयर्स भेज रहा है, क्योंकि इस समय सूरज एक्टिव है। जो अगले 8 सालों तक रहेगा। इस वजह से सौर तूफानों के आने की आशंका बनी रहेगी। सूरज पर बने धब्बे से कोरोनल मास इजेक्शन होता है। यानी सूर्य की सतह पर एक तरह का विस्फोट। इससे अंतरिक्ष में कई लाख किलोमीटर प्रति घंटे की गति से एक अरब टन आवेषित कण फैलते हैं। ये कण जब धरती से टकराते हैं तब कई सैटेलाइट नेटवर्क, जीपीएस सिस्टम, सैटेलाइट टीवी और रेडियो संचार को बाधित करते हैं।    

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जब सूरज के किसी हिस्से में दूसरे हिस्से की तुलना में गर्मी कम होती है, तब वहां पर धब्बे बन जाते हैं। ये दूर से छोटे-बड़े काले और भूरे रंग के धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं। एक धब्बा कुछ घंटों से लेकर कुछ हफ्तों तक रह सकता है। धब्बों अंदर के अधिक काले भाग को अम्ब्रा और कम काले वाले बाहरी हिस्से को पेन अम्ब्रा कहते हैं। आमतौर पर, सीएमई ज्यादा हानिकारक नहीं होते हैं। लेकिन नासा हर समय सूर्य की निगरानी करता हैं।  इसके अतिरिक्त, नासा का पार्कर सोलर प्रोब मिशन समय-समय पर सूर्य का चक्कर लगाते हुए उसकी सेहत की जानकारी देता रहता है। साथ ही सूर्य द्वारा बनाए गए धब्बों और अंतरिक्ष मौसम को बेहतर ढंग से समझ सकें।