भारत में ओमिक्रोन (Omicron in India) के मामलों के साथ ही कोरोना के मामलों में आई तेजी चिंता का विषय है. हालांकि अभी तक ज्‍यादा मरीजों के असिम्‍टोमैटिक या कम गंभीर लक्षणों के होने के चलते विशेषज्ञ इसके प्रति पैनिक न करने लेकिन कोरोना संबंधी नियमों और सावधानियों का कड़ाई से पालन करने की अपील कर रहे हैं. कोरोना के सबसे ज्‍यादा संक्रामक वेरिएंट (Most Infectious Variant) के रूप में सामने आए ओमिक्रोन को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण को रोकने के लिए कोविड व्‍यवहार (Covid Appropriate Behaviour) में सबसे ज्‍यादा जरूरी मास्‍क (Mask) है. वैक्‍सीन रोग की गंभीरता को जरूर कम कर सकती है लेकिन इसके संक्रमण को फैलने से रोकने में मास्‍क कारगर है. मास्‍क पहनने (Wearing Mask) से संक्रमण के फैलाव को कम किया जा सकता है. इसे लेकर बांग्‍लादेश के 600 गांवों में अध्‍ययन किया गया है जो मास्‍क की उपयोगिता को साबित कर रही है.

सितंबर 2021 में प्रकाशित, बांग्‍लादेश के 600 गांवों के 3,40,000 लोगों पर किया गया मास्‍क को लेकर किया गया अध्‍ययन अभी तक का इस संबंध में सबसे बड़ा अध्‍ययन है. साथ ही यह बेहद मजबूत तरीके से बताता है कि कोरोना महामारी (Corona Pandemic) के फैलने की रफ्तार को कम करने में मास्‍क कितना उपयोगी है. हालांकि यह स्‍टडी सिर्फ सर्जिकल मास्‍क (Surgical Mask) पर की गई है. कोरोना की शुरुआत से ही भारत में भी इसके उपयोग को लेकर लगातार अपील की जा रही है. वहीं हेल्‍थकेयर वर्कर्स और फ्रंटलाइन वर्कर्स से लेकर आम लोगों को भी इस मास्‍क को पहनने के लिए कहा जा रहा है.

ये अध्‍ययन बताता है कि करीब 1 लाख 78 हजाार लोगों को मास्‍क बांटने के बाद जब उनके व्‍यवहार और कोविड को लेकर जानकारी जुटाई गई तो चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया. जिसमें देखा गया कि सिम्‍टोमैटिक कोविड के लक्षणों में 11.9 फीसदी की कमी दर्ज की गई जबकि 9.3 फीसदी कमी उन मामलों में देखी गई जिनमें सीरो पॉजिटिविटी पाई गई. यानि कि जो ब्‍लड टेस्‍ट में पॉजिटिव आए थे. ऐसे में देखा गया कि मास्‍क पहनने वालों की संख्या सिर्फ 30 फीसदी बढ़ने से करीब 10 फीसदी तक कोरोना में कमी देखी गई. वहीं अगर मास्‍क पहनने वाले 100 फीसदी हो जाएं तो कोरोना संक्रमण को काफी हद तक कम किया जा सकता है.