37 साल पहले 14 दिसंबर 1983 को ‘आम लोगों की कार’ के नाम से मशहूर प्रतिष्ठित मारुति-सुजुकी 800 कार का जन्म हुआ था। देश में कारों के बाजार में मारुति कंपनी का खास महत्व है। इस कंपनी की कारें आम लोगों के लिहाज बेहद अच्छी और सस्ती मानी जाती हैं। 

Maruti 800 देश की अब तक की सबसे सफल कारों में से एक है। यह भारतीय जनता के लिए किसी सपने से कम नहीं था, क्योंकि लोगों के लिए किफायती पैकेज में इसका मालिक बनने के सपने को पूरा करने का यह अवसर था।

भारत की तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने 14 दिसंबर 1983 के  दिन गुड़गांव में मारुति कारखाने का उद्घाटन किया, जो हर 800 वें मिनट में एक नई कार बनाने का दावा कर रही थी। भारत में यह पहली बार सिर्फ 47,500 रुपए की कीमत पर लॉन्च हुई थी। इसने देश में कारों की सफल यात्रा की शुरुआत की। 

इसी दौरान कंपनी ने अपनी 15 प्रतिशत कारों को वातानुकूलित डीलक्स कारों में बदलने का भी फैसला किया था, जिसकी कीमत 70,000 रुपए थी। लांचिंग के समय कंपनी ने दावा किया कि मारुति सुजुकी कार 50 किमी प्रति घंटे की स्थिर गति से चलने पर 25.95 किमी प्रति लीटर की एवरेज देगी। दिसंबर 1983 में इंदिरा गांधी ने पहली बार मारुति 800 की चाबी हरपाल सिंह को सौंपी थी।

मारुति 800 के लॉन्च के बाद, कंपनी ने अलग-अलग सेगमेंट में प्रवेश करने का फैसला किया। 1984 में ओमनी मिनीवैन और 1985 में भारत प्रतिष्ठित जिप्सी लांच हुई। कुछ साल बाद 1990 में मारुति सुजुकी ने पहली सेडान, जिसे मारुति 1000 कहा जाता है, लांच की। बाद में, 1994 में, इस कार का एक फेसलिफ्ट मॉडल एस्टीम लॉन्च किया गया, जो मूल रूप से भारत में सेडान ट्रेंड की नींव रखी।

भारत के कुछ हिस्सों में इसे आज भी देखा जा सकता है। एस्टीम के बाद 1993 में मारुति सुजुकी ने प्रीमियम हैचबैक ज़ेन को लॉन्च किया। यह मॉडल भारत में बहुत लोकप्रिय हुआ। इसके बाद 1995 में कंपनी का दूसरा प्लांट खोला गया। ठीक चार साल बाद 1999 में तीसरा उत्पादन केंद्र भी खोल दिया गया।

21 वीं सदी की शुरुआत के साथ मारुति सुजुकी ने ऑल्टो के रूप में एक और आइकन लॉन्च किया। पांच साल बाद 2005 में, स्पोर्टी दिखने वाली लाइफस्टाइल स्विफ्ट को लॉन्च किया गया। यह युवाओं में काफी लोकप्रिय हुआ। ऊंची कीमत वाली ग्रैंड विटारा के असफल होने के बाद मारुति सुजुकी ने 2016 में विटारा ब्रेजा बाजार में उतारी। यह हॉटे-सेलिंग कॉम्पैक्ट एसयूवी बनी।