त्रिपुरा उच्च न्यायालय (Tripura High Court) की एक खंडपीठ ने राज्य सरकार को झटका देते हुए कहा कि विवाहित बेटी, जो अपने पिता की आय पर निर्भर है, डाई-इन हार्नेस (die-in harness) मामले में सरकारी नौकरी पाने की पात्र है। मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत मोहंती (Chief Justice Inderjit Mohanty) और न्यायमूर्ति एस सी चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें डाई-इन हार्नेस योजना पर एकल पीठ के आदेश की समीक्षा करने की मांग की गई थी।

पांच अलग-अलग रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए एकल पीठ ने पहले कहा था कि एक विवाहित बेटी, जो अपने पिता की आय पर निर्भर है, डाई-इन हार्नेस योजना (die-in harness) के तहत सरकारी नौकरी पाने की पात्र है। राज्य सरकार ने खंडपीठ के समक्ष एक रिट याचिका दायर कर डाई-इन-हार्नेस योजना पर एकल पीठ के आदेश की समीक्षा करने की मांग की थी। खंडपीठ ने राज्य सरकार (Tripura Government) की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि विवाहित बेटी को डाई-इन-हार्नेस लाभ से वंचित करना संविधान की भावना के साथ-साथ लैंगिक समानता के खिलाफ है।

पांच याचिकाकर्ताओं में से एक का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता हरेकृष्ण भौमिक (Harekrishna Bhowmick) ने फैसले को लैंगिक भेदभाव के खिलाफ जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि हम उच्च न्यायालय को यह समझाने में सक्षम हैं कि सरकार विवाहित बेटियों को डाई-इन-हार्नेस मामले के तहत लाभ प्राप्त करने से बाहर नहीं कर सकती है। उन्होंने बताया कि अदालत ने सरकार से लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के लिए अगले तीन महीनों तक अपने फैसले को उलटने के लिए कहा। बता दें कि 2015 में राज्य सरकार ने एक अधिसूचना के जरिए विवाहित बेटियों को डाई-इन-हार्नेस लाभ से रोक दिय था।