चीन (china) में चल रहे बिजली संकट (electric crisis) से कई दवाएं महंगी हो सकती हैं। बिजली संकट की वजह से दवाओं के रॉ मैटेरियल महंगे हो रहे हैं। रॉ मैटेरियल के साथ पैकेजिंग मैटेरियल की बढ़ी कीमतें और कंटेनर की कम सप्लाई से भी फार्मा कंपनियों की दिक्कतें बढ़ रही है।

इंडस्ट्री के मुताबिक हाल के महीनों में APIs (Active Pharmaceutical Ingredients) के दाम 25-30 फीसदी तक बढ़े हैं। फार्मा इंडस्ट्री के सूत्रों ने कहा है कि अगर कीमतें काबू में नहीं आईं तो कई दवाओं के दाम बढ़ सकते हैं। खासकर से पैरासिटामॉल और कई आम इस्तेमाल वाली एंटी बायोटिक दवाओं के दाम बढ़ना तय हैं।

बड़ी कंपनियां इन दिक्कतों को देखते हुए ऊंचे दाम देकर भी रॉ मैटेरियल का बफर स्टॉक बना रही हैं। लेकिन छोटी कंपनियों को इस संकट से ज्यादा परेशानी हो रही है। आपको बता दें कि भारतीय फार्मा कंपनियां चीन से करीब 70 प्रतिशत तक कच्चा माल इंपोर्ट करती हैं। सरकार देश में ही दवाओं के जरूरी रॉ मैटेरियल प्रोडक्शन को इंसेटिव देकर बढ़ाने की स्कीम लेकर आई है लेकिन उसका असर दिखने में अभी वक्त लगेगा। सिप्ला के ग्लोबल सीएफओ (Chief Financial Officer) केदार उपाध्ये ने कहा है कि इंडस्ट्री की ये दिक्कत अभी कुछ समय तक बनी रह सकती है। 

अगर जल्द ही कीमतें काबू में नहीं आईं तो आम लोगों पर इसका असर पड़ेगा। लोगों को पैरासिटामॉल और एंटी बायोटिक जैसी दवाओं के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पडेंगे। बड़ी कंपनियां पर भले ही इसका कम असर देखने को मिले लेकिन चीन के बिजली संकट से छोटी दवा कंपनियों को ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। इंसेटिव देकर API प्रोडक्शन बढ़ाने की योजना बनी हैं लेकिन इसके असर के लिए हमें इंतजार करना होगा।