केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शनिवार को एनआरसी की अंतिम सूची प्रकाशित कर दी है। 3 करोड़ 11 लाख 21 हजार चार लोगों के नाम एनआरसी सूची में शामिल हैं। वहीं 19 लाख 6 हजार 657 लोगों के नाम सूची में शामिल नहीं हैं। असम में नागरिकता पहचान का काम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुआ है। सूची को लेकर लाखों लोगों के दिल की धड़कन अपने भविष्य को लेकर बढ़ी हुई हैं।


अमित शाह को सौपेंगे रिपोर्ट

वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने दिल्ली के लिए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की मांग करते हुए कहा कि आतंकवाद से लड़ाई के लिए एनआरसी बहुत जरूरी है। तिवारी ने कहा कि वह एनआरसी के मुद्दे पर दिल्ली की जमीनी हकीकत से संबंधित एक रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपेंगे।



उत्पीड़न करने का इरादा नहीं

उन्होंने कहा, ''दिल्ली में एनआरसी की मांग कर हमारा इरादा किसी का उत्पीड़न करने का नहीं है। उन्होंने कहा, ''जिन लोगों के नाम एनआरसी सूची से बाहर रखे गये हैं, उनका उत्पीड़न नहीं किया जा रहा है। यह हमारे देश की नीति है कि किसी भी विदेशी नागरिक को अपने देश लौटना होता है और जिनके पास देश की नागरिकता का सबूत नहीं होता उन्हें भी अपने देश लौटाया जाता है।


बेहतर साबित होगा एनआरसी

उन्होंने कहा कि दिल्ली में बड़ी संख्या में विदेशी लोग अवैध रूप से रह रहे हैं। उन्होंने सरकारी जमीनों पर कब्जा कर रखा है और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा बने हुए हैं। एनआरसी आतंकवाद से लड़ाई में बेहद कारगर साबित होगा क्योंकि घुसपैठिए देश की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं। इतना ही नहीं एनआरसी रोहिंग्या घुसपैठियों को देश में घुसने से रोकने में भी कारगर साबित होगा।