ब्रिटेन में ‘निर्वासन में मणिपुर सरकार’ की घोषणा करने वाले मणिपुर के दो असंतुष्ट नेताओं पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने का केस दर्ज किया गया है। मणिपुर के पूर्व राजालेशेम्बा सनाजाओबा ने इन असंतुष्ट नेताओं की निंदा की है। इन नेताओं ने पूर्व राजा सनाजाओबा का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हुए सरकार के गठन की घोषणा की थी। 

खबर है कि मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने निर्वासित सरकार बनाने की घोषणा की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इन लोगों पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने का केस दर्ज किया गया है। इस मामले की शुरुआती जांच स्पेशल क्राइम ब्रांच करेगी। बाद में मामला नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआइए) को सौंप दिया जाएगा क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय मामला है। 

पूर्व राजा सनाजाओबा ने भी असंतुष्ट नेताओं की घोषणा की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा है कि इस मामले में उनका नाम घसीटना घिनौनी हरकत है। इस तरह की घोषणा से समाज में नकारात्मक ऊर्जा का प्रसार होगा।

इससे पहले लंदन में असंंतुष्याट नेता याम्बेन बिरेन ने ‘मणिपुर स्टेट काउंसिल का मुख्यमंत्री’ और नरेंगबाम समरजीत ने ‘मणिपुर स्टेट काउंसिल का रक्षा और विदेश मंत्री’ होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि वे ‘मणिपुर के महाराजा’ की ओर से बोल रहे हैं और औपचारिक तौर पर निर्वासन में ‘मणिपुर स्टेट काउंसिल’ की सरकार शुरू कर रहे हैं।

इन नेताओं ने ब्रिटेन में अपनी शरण का दर्जा मिलने के बाद कहा है कि विधिवत सरकार को मणिपुर से लंदन स्थानांतरित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि हम मानते हैं कि अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मणिपुर की स्वतंत्र सरकार को सार्वजनिक करने और मान्यता प्राप्त करने का सही समय है। हम संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों की संप्रभु राज्यों की सभी सरकारों को मान्यता के लिए अपील करते हैं कि आज से यह मणिपुर की निर्वासित सरकार है।

इन लोगों का दावा है कि 3 मिलियन मणिपुरी लोग अपना मूल राष्ट्र के तौर पर मान्यता चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत सरकार के साथ जुड़ने की उनकी कोशिश नफरत और शत्रुता से भरी हुई है। उन्होंने दावा किया कि 1528 से अधिक असाधारण हत्या के मामले हैं जो भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित हैं।

इतना ही नहीं बल्कि इन नेताओं ने दावा किया है कि वो मणिपुर राज्य मणिपुर में मणिपुर राज्य संविधान अधिनियम 1947 के तहत बनाई गई सरकार है। इसे 14 अगस्त, 1947 को ब्रिटिश राज से स्वतंत्रता मिली। अब उनका है कि मणिपुर के संप्रभु राज्य को भारत से बाहर कर दिया गया था। 27 दिसंबर 1946 को महामहिम द्वारा परिषद में आदेश और भारत सरकार ने अधिनियम 1949 का उल्लंघन करके भारत के मणिपुर राज्य को रद्द कर दिया। उन्होंने कहा है कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय से अपील करेंगे और प्रिवी काउंसिल से आदेश मिलने के बाद वे संयुक्त राष्ट्र को मान्यता के लिए स्थानांतरित करेंगे।