केंद्र सरकार को सप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च न्यायलय ने केंद्र की उस क्यूरेटिव पिटिशन को खारिज कर दिया, जिसमें मणिपुर में (जहां AFSPA लागू है) कथित मुठभेड़ों के मामले में सुरक्षा बलों की भूमिका  की जांच करने की पुलिस को आजादी देने संबंधी फैसले को रिकॉल करने की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश केएस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह कहते हुए केंद्र की क्यूरेटिव पिटिशन खारिज कर दी, कि हमने क्यूरेटिव पिटिशन और संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से देखा है। हमारी राय में रूपा अशोक हुर्रा के मामले में कोर्ट के फैसले में जो संकेत हैं, उसके पैरामीटर्स पर कोई केस नहीं बनता है।

केंद्र ने कहा था कि इस फैसले पर फिर से विचार किया जाए नहीं तो उग्रवादियों के खिलाफ सेना के आपरेशन में असर पड़ेगा। यहां तक कि ये आदेश AFSPA के प्रावधानों पर भी असर डाल रहा है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सेना या पुलिस ऐसे मामलों में एक्सेस पावर का इस्तेमाल नहीं कर सकती और आत्मरक्षा के लिए न्यूनतम बल यानी फोर्स का इस्तेमाल किया जाए।

 

केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि जिस राज्य में मिलिटेंट इनसर्जेंसी चल रही हो ऐसे मामलों में आत्मरक्षा का सवाल नहीं बल्कि हमले करने का होता है। इसका असर उतर पूर्वी राज्यों और जम्मू कश्मीर में पड़ता है, जहां AFSPA लगा हुआ है। ऐसे इलाकों में सेना को आपरेशन चलाने के लिए आत्मरक्षा नहीं बल्कि हमला करना होता है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट अपने आदेश पर फिर से गौर करे और इस पर जल्द सुनवाई हो। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट पुर्नविचार याचिका भी खारिज कर चुका है।