त्रिपुरा के विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद माणिक सरकार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। रविवार को माणिक सरकार ने राज्यपाल तथागत रॉय से मुलाकात की और अपना त्यागपत्र सौंपा। हालांकि त्रिपुरा में नई सरकार का गठन होने तक वह कामकाज संभालते रहेंगे।

आपको बता दें कि भाजपा-आईपीएफटी गठबंधन ने त्रिपुरा में 25 साल के लेफ्ट फ्रंट के शासन का अंत कर दिया। इस गठबंधन को दो तिहाई से ज्यादा सीटें मिली। 51 सीटों पर चुनाव लडऩे वाली भाजपा ने 35 सीटों पर जीत दर्ज की जबकि उसकी सहयोगी आईपीएफटी ने 9 सीटों पर चुनाव लड़ा और 8 पर जीत दर्ज की। 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को महज 1.5 फीसदी वोट मिले थे और उसके 50 में से 49 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। इस बार सिर्फ भाजपा को 43 फीसदी वोट मिले।

त्रिपुरा मे हार के बाद अब लेफ्ट फ्रंट त्रिपुरा में अपने सबसे कमजोर आंकड़े पर पहुंच गया है। साल 2013 में 50 सीटें हासिल करने वाले लेफ्ट फ्रंट को सिर्फ 16 सीटें मिली है। 25 साल तक त्रिपुरा में शासन करने करने वाले लेफ्ट फ्रंट के लिए यह हार सामान्य नहीं है। वामपंथी अब देश में सिर्फ केरल तक सीमित रह गए हैं। पिछले दिनों संघ परिवार से मुकाबले के लिए पार्टी की रणनीति को लेकर हुई मीटिंग के दौरान माणिक सरकार ने पूर्व सीपीएम महासचिव प्रकाश करात का समर्थन किया था।

सीताराम येचुरी का कहना था कि पार्टी को भाजपा से निपटने के लिए कांग्रेस से गठबंधन करना चाहिए जबकि करात के गुट की राय इससे अलग थी। त्रिपुरा के चुनाव से पहले भी इस स्टैंड को लेकर पार्टी में दो मत थे और विधानसभा चुनाव में पार्टी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।