प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भारतीय जनता पार्टी के कई शीर्ष नेताओं के आक्रामक चुनावी अभियान का जवाब देने लिए माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने धलाई जिले के सुर्मा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के शांति बाजार में एक चुनावी महारैली आयोजित करने की योजना है। माकपा के स्टार अभियानकर्ता और मुख्यमंत्री माणिक सरकार दोपहर बाद शांति बाजार में आयोजित रैली को संबोधित करेंगे। इस रैली का समय ऐसे समय तय किया गया है जब कैलाशहार में मोदी भाजपा की महारैली को संबोधित करने वाले हैं।

इसके आयोजन से स्पष्ट है इससे भाजपा की रैली ही प्रभावित होगी। धलाई जिले के अंबासा समेत राज्य के विभिन्न इलाकों से बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता कैलाशहार पहुंच चुके हैं। दिन में भी बड़ी संख्या में राजनीतिक रुप से संवेदनशील शांति बाजार, कुलाई और हलाली समेत विभिन्न इलाकों से भी भाजपा कार्यकर्ताओं के आने का क्रम जारी है। भाजपा चुनाव अभियान के एक आयोजक ने कहा कि हम माकपा के इरादे से अवगत है, लेकिन उनकी साजिश सफल नहीं होगी। माकपा हर प्रकार की चाल चलकर भी कैलाशहर में मोदी की महारैली को विफल नहीं कर सकती, जिसमें उनाकोति, धलाई और उत्तरी त्रिपुरा के जिलों में से कम से कम 20 उम्मीदवार और लोंगतोराई समुदाय के कुछ प्रमुख लोग भी शामिल रहेंगे।


कैलाशहार शहर के भाजपा कार्यकर्ता अविनाश तालुकदार ने दावा किया कि विभिन्न सर्वेक्षणों और विश्लेषणों में भाजपा के सत्ता में आने की संभावना व्यक्त की गयी है। वाम कार्यकर्ता इस बात से निराश और हताश हैं। कांग्रेस शासन को समाप्त कर माकपा नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार 1993 में राज्य में सत्ता में आयी। मौजूदा मुख्यमंत्री 1998 से ही इस पद पर कायम हैं। भाजपा नेतृत्व पूर्वाेत्तर राज्यों में भी अपना सत्ता कायम करने के इरादे से चुनाव लड़ रहा है तथा यही वजह है कि इस इलाके में पिछले दो वर्षाें के दौरान इसकी संगठनात्मक गतिविधियों में काफी तेजी आयी है।

कांग्रेस के कई नेताओं और समर्थकों के अलावा माकपा के भी कुछ लोग भाजपा का दामन थाम चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मोदी की रैली के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के कई लोग भाजपा में शामिल होंगें। दिवंगत वाम नेता नीति देव वर्मन के गांव सायदाछारा में उनके पोते सजल देव वर्मा समेत 16 परिवारों के 60 मतदाता भाजपा में शामिल हो गये। सांप्रदायिक रुप से संवेदनशील कैलाशहार में भी अच्छी संख्या में मुसलमानों की रणनीति में चुनाव के अंतिम समय में बदलाव की भी संभावना है। प्रधानमंत्री की राज्य में पहली चुनावी रैली सोनामुरा में आयोजित है, जिसे मुख्यमंत्री श्री सरकार को सीधी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार का निर्वाचन क्षेत्र धानपुर उस इलाके से सटा हुआ है जहां मोदी की रैली होनी है।