त्रिपुरा में जैसे चुनावाें के दिन नजदीक आ रहे हैं वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के नेताअों की जुबानी जंग तेज होती नजर आ रही है। 60 सीटों वाली विधानसभा त्रिपुरा में 18 फरवरी को मतदान हाेगा। राज्य में अभी मतदान काे दस दिन बाकी है आैर त्रिपुरा में इस बार माकपा आैर भाजपा के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। राज्य में हमेशा से कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल रही है लेकिन इस बार भाजपा ने दूसरे नंबर पर एंट्री मारी है आैर लाल किले काे गिरा कर सरकार बनाना चाहती है। भाजपा पूरी तैयारी से मैदान में उतरी  है। 


 
भाजपा के बड़े नेताआें ने राज्य में चुनावी रैलियों आैर यात्राआें की शुरूआत कर दी है। 4 फरवरी का त्रिपुरा में रैली का संबाेधित करते हुए गृह मंत्री राज नाथ सिंह ने राज्य के मुख्यमंत्री माणिक सरकार पर निशाना साधा आैर कहा था कि त्रिपुरा बेरोजगारी में अव्वल है। ताे वहीं आज यानि 7 फरवरी को त्रिपुरा के भाजपा ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट करते हुए माणिक सरकार को आड़े हाथ लिया है। ट्वीट में लिखा है कि केंद्र सरकार ने राज्य के लिए जो फंड दिया है वो सरकार ठीक ढंग से उपयोग करने में नाकाम रही है। 



इतना ही नहीं अभी हालही में चुनावों काे मद्देनजर रखते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी त्रिपुरा का दौरा किया था आैर माणिक सरकार पर भ्रष्ट होने का आरोप लगाया था। शाह ने कहा था कि लंबे समय से राज्य में सत्तारूढ़ माकपा सरकार ने राज्य को गरीबी और बेरोजगारी दी है तथा महिलाओं की सुरक्षा और राज्य की सुरक्षा दांव पर लगा रखी है। इसके अलावा सरकार ने माफिया राज को बढ़ावा दिया है जिसके कारण गरीब लोगों की मेहनत की कमाई को चिट फंड कंपनियों द्वारा लूटा जा रहा है।

 


 
ताे वहीं ये जुबानी हमलों का सिलसिला यहीं नहीं थमा सोमवार को मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने बीजेपी की हिन्दूवादी एजेंडे की आलोचना करते हुए कहा था कि पूरा देश भाजपा के हिन्दूवादी एजेंडे का विरोध कर रहा है। क्योंकि भाजपा, आरएसएस, वीएचपी और उनके सहयोगी जाति, धर्म आैर समुदाय के आधार पर देश का बटवारा करना चाहते हैं।