त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री और माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पोलित ब्यूरो सदस्य माणिक सरकार को विपक्षी माकपा विधायकों की बैठक में विधानसभा का नेता प्रतिपक्ष चुन लिया गया। यह जानकारी पार्टी की ओर से जारी बयान में दी गई।

पार्टी के नवनिर्वाचित 16 विधायकों की बैठक में बादल चौधरी को उपनेता तथा तपन चक्रवर्ती को मुख्य सचेतक चुन लिया गया जबकि प्रभात चौधरी को उप सचेतक बनाया गया। बैठक की अध्यक्षता पूर्व मंत्री  बादल चौधरी ने की और इसमें पार्टी सचिव बिजन धर और राज्य समिति सदस्य गौतम दास ने भाग लिया। पार्टी विधायक चुनाव बाद हिंसा और विपक्षी समर्थकों पर ज्यादतियों के खिलाफ सदन में आवाज उठाएंगे।

वहीं दूसरी तरफ माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की त्रिपुरा इकाई ने राज्य के पुलिस महानिदेशक से पार्टी कार्यालयों की तलाशी रोके जाने और उनकी पर्याप्त सुरक्षा की मांग की है। वरिष्ठ माकपा नेता एवं राज्य के पूर्व मंत्री बादल चौधरी, माकपा की प्रदेश इकाई के प्रवक्ता गौतम दास, पूर्व सांसद नारायण कार और सांसद शंकर प्रसाद दत्ता के पुलिस महानिदेशक को सौंपे गये हस्ताक्षरित ज्ञापन में कहा गया है कि पार्टी कार्यालय का परिचालन संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकार है और पुलिस की यह जिम्मेदारी है कि वह राजनीतिक दलों की लोकतांत्रिक गतिविधियों को संरक्षण प्रदान करे। इसके साथ ही वह राजनीतिक दलों के कामकाज को सुचारु तरीके से चलने देने में सहयोग करें।

माकपा नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस राज्य में सत्तारूढ़ नये दल के इशारे पर उनके कार्यालयों पर छापे डाल रही है और तलाशी अभियान चला रही है। लोकतंत्र ने यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों की घोषणा के बाद से राज्य में 96 माकपा कार्यालय जला दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि 367 माकपा कार्यालयों में तोडफ़ोड़ और लूट की गयी। भाजपा कार्यकर्ताओं ने 233 माकपा कार्यालयों पर कब्जे कर लिये हैं और माकपा कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों के 1829 घर जला दिये गये हैं। माकपा ने पुलिस महानिदेशक से पार्टी कार्यालयों, ट्रेड यूनियन कार्यालयों पर छापे और तलाशी अभियान रोकने की मांग की है।