त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार की छवि एक ईमानदार नेता की है।  वे जनता से सीधा जुड़ाव पसंद करते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि सरकार के पास मोबाइल फोन तक नहीं है। यही नहीं न तो उनका ई-मेल अकाउंट है और न ही वह सोशल मीडिया पर सक्रिय है। माणिक सरकार का न तो फेसबुक अकाउंट है और न ही ट्विटर हैंडल।

माणिक सरकार पिछले 20 साल से राज्य के मुख्यमंत्री हैं, अगर वह फिर राज्य के मुख्यमंत्री बन जाते हैं तो यह अपने आप में एक रिकॉर्ड होगा। माणिक सरकार के पास पर्सनल कार तक नहीं है। न ही उनका खुद का घर है। वह अपनी पत्नी के साथ सरकारी आवास में ही रहते हैं। माणिक सरकार देश के सबसे गरीब मुख्यमंत्री है। माणिक सरकार सीपीएम पोलित ब्यूरो के सदस्य हैं। पार्टी उनकी ईमानदार छवि को भुनाकर 1993 से चुनाव जीतती आ रही है। माणिक सरकार अपनी परंपरागत सीट धानपुर से चुनाव लड़ रहे हैं।

चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करते वक्त उन्होंने शपथपत्र दाखिल किया। इसमें उन्होंने अपनी संपत्ति का ब्योरा दिया है। माणिक सरकार को मुख्यमंत्री के रूप में हर माह 26 हजार 315 रुपए वेतन के रूप में मिलते हैं। सरकार पूरी सैलरी पार्टी फंड में दान कर देते हैं। उन्हें अपना खर्चा निकालने के लिए सीपीएम प्रति माह 5 हजार रुपए का भत्ता देती है। माणिक सरकार के पास सिर्फ 1520 रुपए कैश हैं जबकि 2,410 रुपए बैंक खाते में है। 2013 के विधानसभा चुनाव के वक्त उन्होंने जो हलफनामा दाखिल किया था उसके मुताबिक उस दौरान उनके बैंक खाते में 9, 720.38 रुपए थे।

मुख्यमंत्री के पास कृष्णानगर में 0.0118 एकड़ जमीन है। इसमें उनकी अकेली बहन भी भागीदार है। माणिक सरकार इस बार भी पारंपरिक सीट धानपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। धानपुर सेमी अरबन सेंटर है जो राजधानी अगरतला से 65 किलोमीटर दूर स्थित है। माणिक सरकार 1998 से लगातार इस सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं। 1998 में इसी सीट से चुनाव जीतने के बाद माणिक सरकार पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। धानपुर सीट शुरु से वामपंथियों का गढ़ रही है। 1972 से लेकर अब तक(2013) हर बार यहां से सीपीएम उम्मीदवार ही चुनाव जीतते आ रहे हैं। माणिक सरकार चार बार इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं।

इससे पहले सीपीएम के ही समर चौधरी पांच बार यहां से विधायक रहे हैं। इस लिहाज से देखें तो यहां से माणिक सरकार को हराना करीब करीब नामुमकिन है। इस बार भी इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला है। भाजपा ने फिर प्रतिमा भौमिक को चुनाव मैदान में उतारा है। भौमिक पहले भी इस सीट से दो बार चुनाव लड़ चुकी है लेकिन दोनों बार उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। प्रतिमा चौधरी 1998 और 2003 में दोनों बार तीसरे स्थान पर रही। आपको बता दें कि प्रतिमा चौधरी स्टेट बीजेपी की महासचिव हैं। इस बार कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बदल लिया है। कांग्रेस ने लक्ष्मी नाग को पार्टी का प्रत्याशी बनाया है। 2013 के विधानसभा चुनाव में माणिक सरकार ने कांग्रेस के शाह आलम को 6,017 वोटों से हराया था। माणिक सरकार को कुल 21,286 वोट मिले थे जबकि शाह आलम को 15,269। माणिक सरकार को पहली बार 21 हजार से ज्यादा वोट मिले थेे।