पूर्वोत्तर राज्य असम में डी-वोटर का नोटिस मिलने से परेशान एक शख्स ने फांसी लगा ली। विदेशी पहचान न्यायाधिकरण उदालगुड़ी ने जिले के हरसिंगा थाने के उलुबाड़ी (घाग्रा) निवासी दीपक देवनाथ नामक बंगाली समुदाय के व्यक्ति को डी-वोटर नोटिस भेजा था। नोटिस मिलने से परेशान देवनाथ ने रविवार को फांसी लगाकर अपनी जान दे दी।
अचरज की बात यह है कि उसका नाम विगत 31 जुलाई को जारी अंतिम मसौदा एनआरसी में दर्ज बताया गया है। फिर भी उसके पास विदेशी न्यायाधिकरण से डी-वोटर का नोटिस पहुंचना कई तरह के सवाल खड़े करता है। घटना से नाराज हजारों की संख्या में लोगों ने सड़क जाम कर दिया। सरकार के खिलाफ नारे भी लगाए। मिली जानकारी के मुताबिक विदेशी पहचान न्यायाधिकरण से अपने पास नोटिस पहुंचने के बाद से देबनाथ खुद को वास्तविक भारतीय साबित करने के लिए काफी भटका। इस भागदौड़ ने उसे मानसिक तौर पर इतना निराश कर दिया कि आखिरकार वह फांसी पर लटक गया।
अखिल बीटीसी बंगाली युवा छात्र फेडरेशन के सलाहकार श्यामल सरकार के मुताबिक एनआरसी अद्यतन प्रक्रिया और डी-वोटर नोटिस अनेक वास्तविक भारतीयों के लिए दुःस्वपन हैं। उन्होंने विदेशी पहचान न्यायाधिकरण, सीमा पुलिस और राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। बंगाली हिंदुओं के खिलाफ राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया है।
अखिल असम बंगाली युवा छात्र फेडरेशन के अध्यक्ष कमल चौधरी ने कहा कि घटना दुर्भाग्यपूर्ण तो है ही, इसने साबित कर दिया है कि बांगाली हिंदुओं को सरकारी तंत्र की ओर से जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने पीड़ित परिवार को दस लाख का मुआवजा और एक मृतक आश्रित को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। फिलहाल इस घटना को लेकर उदालगुड़ी पुलिस अधिकारी कुछ कहने से बच रहे हैं।