पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा की जांच मामले में ममता सरकार को हाईकोर्ट से झटका लगा है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने चुनाव बाद हुई हिंसा मामले में सीबीआई की जांच का आदेश दिया है। हालांकि, इस फैसले से ममता सरकार खुश नजर नहीं आ रही है।

 ममता सरकार ने कहा है कि वह इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। हाईकोर्ट के इस फैसले भाजपा को अब हमला बोलने का मौका मिल गया है और उसने कहा है कि इस फैसले ने सरकार को उजागर कर दिया है। 

ममता बनर्जी के करीबी और टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि मैं इस फैसले से नाखुश हूं। अगर हर कानून और व्यवस्था के मामले में, जो पूरी तरह से राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में है, सीबीआई का दखल होता है तो यह राज्य के अधिकार का उल्लंघन है। मुझे यकीन है कि राज्य सरकार स्थिति को समझेगी और अगर जरूरत हुई तो सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का निर्णय लेगी। 

वहीं, कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि हम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। लोकतंत्र में सभी को अपनी विचारधारा फैलाने का हक है मगर हिंसा फैलाने की इजाजत नहीं है। लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। वहीं, भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा राज्य सरकार के संरक्षण में हुई। कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश ने सरकार की पोल खोल दी है। हम अदालत के आदेश का स्वागत करते हैं: 

बता दें कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिन्दल की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय पीठ ने चुनाव के बाद कथित हिंसा के संबंध में अन्य आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का भी आदेश दिया। पीठ ने कहा कि दोनों जांच अदालत की निगरानी में की जाएंगी। उसने केंद्रीय एजेंसी से आगामी छह सप्ताह में अपनी जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा। एसआईटी में महानिदेशक (दूरसंचार) सुमन बाला साहू, कोलकाता पुलिस आयुक्त सौमेन मित्रा और रणवीर कुमार जैसे आईपीएस अधिकारी होंगे।