भगवान कृष्ण की बात हो और माखन मिसरी का नाम न आए ऐसा कैसे हो सकता है। कान्हा तो पूरे वृंदावन में प्रसिद्ध ही माखन चोर के नाम से हुए थे। कहते हैं मां यशोदा भी उन्हें माखन मिसरी खिलाकर ही अपना स्नेह जताती थीं। यही वजह है जब जन्माष्टमी आती है या कृष्ण पूजा का कोई भी अवसर होता है तो उन्हें माखन मिसरी का भोग जरूर लगाया जाता है। अब आप जरूर जानना चाहेंगे कि कान्हा को मक्खन इतना अधिक प्रिय क्यों था। क्या वो सिर्फ मक्खन के स्वाद पर रीझ गए थे या इसकी वजह थी कुछ और। अगर समझें तो मक्खन प्रेम से भी एक संदेश ही दिया था भगवान कृष्ण ने।

कान्हा को गायों से अति प्रेम था। उनके दूध से बने मक्खन के भी वो बेहद शौकीन ही बताए जाते रहे हैं। कहा जाता है कि माखन मिसरी के साथ वो हमेशा सेहत का संदेश देते रहे। दरअसल मक्खन में काफी पोषक तत्व होते हैं। मक्खन का सेवन करके कान्हा यही संदेश देते रहे कि स्त्री हो या पुरुष सभी को मक्खन का सेवन करना चाहिए। इस मक्खन के साथ मिसरी इसलिए मिलाकर खाई जाती है क्योंकि मिसरी से मक्खन का सारा पोषण शरीर में पहुंचता है। इसलिए कान्हा हमेशा स्वादिष्ट मक्खन को चट कर जाया करते थे।

कान्हा का पसंदीदा सफेद मक्खन बनाना भी बहुत आसान है। अगर आप चाहें तो इस जन्माष्टमी अपने हाथों से बने मक्खन का भोग कान्हा को अर्पित कर सकती हैं। बस तैयारी कुछ दिन पहले से करनी होगी। सफेद मक्खन बनाने के लिए दूध की मलाई कुछ दिन पहले से निकालकर जमा करना शुरू कर दें। मलाई को फ्रिज में रखते जाएं। जब मलाई अच्छी मात्रा में जमा हो जाए तो इसे फ्रीज से निकालकर कुछ देर के लिए बाहर रखें। ताकि ये सामान्य तापमान पर आ जाए। इस मिक्सर में डालें और फेंटते जाएं। दूध से मक्खन अलग होता जाएगा। एक कटोरी में बर्फ का पानी रखें। याद रखें मक्खन को आपको अपने हाथ से ही निकालना है। फेंटे हुए दूध से मक्खन निकाल निकालकर बर्फ के पानी में डालते जाएं। जब दूध से मक्खन पूरा अलग हो जाए और सिर्फ छाछ ही बचे तब समझिए कि प्रोसेस पूरी हो चुकी है। बर्फ के पानी में डलने की वजह से मक्खन जम चुका होगा। उसे एक बर्तन में ढक कर फ्रिज में स्टोर करके रखें।