पौष कृष्ण पंचमी पर सोमवार को सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ ही धनु संक्रांति यानी मलमास शुरू हो गया। मलमास एक माह तक रहने से उसका असर 14 जनवरी को देर रात दो बजकर 08 मिनट तक रहेगा, ऐसे में इस बार मकर संक्रांति का पर्व दो दिन 14 और 15 जनवरी को मनाया जाएगा। पहले दिन यानी 14 जनवरी को पतंगबाजी होगी, वहीं 15 जनवरी को दान-पुण्य का दौर चलेगा। इसके साथ ही मांगलिक कार्य फिर से शुरू होंगे।

पंडित बंशीधर ज्योतिष पंचांग के ज्योतिषाचार्य दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि इसबार मलमास 16 दिसम्बर से शुरू होने से मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। सोमवार से मलमास प्रारंभ होकर एक महीने तक चलेंगे। इस दौरान शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। मलमास का असर 14 जनवरी की मध्यरात्रि बाद दो बजकर 08 मिनट तक रहने के कारण इस बार मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा।

ज्योतिषाचार्य शर्मा ने बताया कि सूर्य धनु राशि में प्रवेश कर जाएगा, धनु राशि गुरु बृहस्पति की राशि है, ऐसे में सूर्य के गुरु की राशि में जाने से शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। इस दौरान एक माह तक विवाह संस्कार, नए कार्य प्रारम्भ, नए मकान का निर्माण, संपत्ति क्रय करने के साथ किसी भी मांगलिक कार्य को करना वर्जित माना गया है। मलमास के दौरान पौष बड़ों के आयोजन की धूम रहेगी और श्रद्धालु दानपुण्य कर सकेंगे।

धनु संक्रांति के साथ ही सर्दी का कहर शुरू हो गया, जो 24 जनवरी तक रहेगा। ज्योतिषिय गणनाओं के अनुसार इस बीच 40 दिन हाड़कंपाने वाली सर्दी पड़ेगी। इस बीच धनु राशि में पंचग्रही योग भी बनेगा, जो सर्दी के तेवरों को बढ़ाएगा। 24 जनवरी तक सर्दी अपने तेवर दिखाएगी। ज्योतिषाचार्य दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि इस बार चिल्ला 40 दिन तक रहेगा, इसबीच हाड़ कंपा देने वाली सर्दी पड़ेगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार धनु राशि में सूर्य का भ्रमण 0 डिग्री से मकर राशि में 10 डिग्री तक रहेगा। यह अवस्था 40 दिन तक रहेगी। इस काल में सबसे अधिक सर्दी पड़ती हैं, जिसके कारण इसे चिल्ला कहते हैं।

ज्योतिषाचार्य पुरुषोत्तम गौड ने बताया कि इस बार धनु राशि में सूर्य के प्रवेश के साथ ही पंचग्रही योग भी बन रहे हैं। पंचग्रही योग चिल्ला में सर्दी बढ़ाएंगे। सर्दी अधिक पड़ेगी। पहाड़ों पर हिमपात होगा, वहीं कहीं-कहीं वर्षा और ओले की संभावना भी रहेगी। धनु राशि में बुध, बृहस्पति, शनि और केतू पहले से ही चल रहे हैं, अब सूर्य के प्रवेश करने के साथ ही पंचग्रही योग बनेगा, जो प्राकृतिक प्रकोप को बढ़ाता है। यह पंचग्रही योग शीत लहर के साथ ओले गिरने की संभावना को भी बढ़ाता है।

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