देश के कई प्रमुख संस्थाओं के प्रमुख के पद काफी समय से खाली हैं। लेकिन उन पदों पर भर्ती नहीं हाे पा रही है। पिछले साल IIT रूड़की के चेयरमैन पद पर जानेमाने वैज्ञानिक अनिल काकोडकर की नियुक्ति को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद भी उनकी नियुक्ति नहीं हो रही है। इसी तरह कई IIT के प्रमुख के पद लंबे समय से खाली हैं।

IGNOU आैर त्रिपुरा यूनिवर्सिटी में नहीं वीसी

IGNOU, त्रिपुरा यूनिवर्सिटी और विश्व भारती जैसे संस्थाओं के वाइस चांसलर (वीसी) के पद तो दो साल से अधिक समय से खाली हैं। अब एेसे खाली पद एक सवालिया निशान पैदा कर रहे है कि क्या इन पदों के लिए देश में समक्ष लोगों की कमी है। तो बता दें कि एेसा कुछ नहीं है बल्कि केंद्र की मोदी सरकार की अचंभित करने वाली स्क्रीनिंग प्रक्रिया के कारण ये सारी नियुक्तियां रुकी हुई हैं।

यूजीसी में भी दो साल नहीं है कोर्इ वायस चांसलर

IGNOU, त्रिपुरा यूनिवर्सिटी और विश्व भारती के अलावा मौजूदा समय में अधिकतर IITs में चेयरमैन नहीं हैं। यहां तक कि देश के विश्वविद्यालयों का नियमन यानी रेग्युलेट करने वाली संस्था विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) में दो साल कोई वाइस चांसलर नहीं हैं।

नियुक्ति न होने की वजह

दरअसल, IIT रूड़की के चेयरमैन पर वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक अनिल काकोडकर की नियुक्ति को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंजूरी दी थी। लेकिन मानव संसाधन विकास मंत्रालय अभी तक इस नियुक्ति को अंतिम रूप नहीं दे पाया है। एक अंग्रेजी अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार इन अहम पदों पर नियुक्ति से पहले उम्मीदवारों के पूरे करियर को खंगालती है। इसमें उम्मीदवारों की सोशल मीडिया प्रोफाइल से लेकर उनके समर्थकों और विरोधियों तक की पड़ताल की जा रही है।

पीएम मोदी की स्क्रीनिंग प्रक्रिया के कारण रूकी है नियुक्ति


सरकार के कामकाज को लेकर उनके विचार और उनके दोस्तों व उनसे जुड़े लोगों की प्रोफाइल भी खंगाली जा रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि मनमोहन सरकार में अहम जिम्मेवारी निभाने के कारण अनिल काकोदकर की नियुक्ति को अंतिम रूप नहीं दिया जा रहा है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इन पदों पर नियुक्ति की अंतिम मंजूरी पीएमओ से मिलती है। इसमें यह भी दावा किया गया है कि सरकार ने इन पदों पर नियुक्ति के लिए सात स्तरीय स्क्रीनिंग प्रक्रिया को लागू किया है जिसमें सबसे अंत में प्रधानमंत्री कार्यालय से इसकी मंजूरी दी जाती है।

जांच पड़ताल की है लंबी प्रक्रिया

उसके बाद ही इन पदों पर किसी की नियुक्ति होती है। इस कारण पिछले दिनों कई संस्थाओं को अपने प्रमुख हासिल करने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच पड़ताल की लंबी प्रक्रिया से गुजरने के बाद यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी बड़े पद पर नियुक्त किए जाने वाले व्यक्ति में सरकार भरोसा कर सकती है।