गुरुग्राम के पटौदी रोड स्थित ख्वासपुर गांव में रविवार शाम को तीन मंजिला इमारत अचानक ढग गई। बिल्डिंग गिरने के कारण हुए तेज धमाके के साथ आसमान में धूल का गुब्बार छा गया। इमारत गिरने से आस-पास के इलाकों में हड़कंप मच गया। लोगों ने घटना की सूचना सबसे पहले पुलिस को दी। मौके पर पुलिस ने पहुंच कर तुरंत राहत बचाव कार्य शुरू किया। 

बाद में राहत कार्य के लिए दमकल, सिविल डिफेंस और एनडीआरएफ की टीमें भी मौके पर पहुंची और देर रात तक रेस्क्यू में जुटी रही। रेस्क्यू के दौरान करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद करीब साढ़े नौ बजे टीमों ने एक व्यक्ति को मलबे के नीचे से बाहर निकाला। मौके पर मौजूद डॉक्टरों ने जांच की तो व्यक्ति की सांसें चल रही थी। जिसे इलाज के लिए अस्पताल रेफर कर दिया गया। 

डीसीपी मानेसर वरुण सिंगल ने बताया कि इमारत गिरने से मलबे के नीचे चार से पांच लोगों के दबे होने की आशंका है। जिनमें से एक व्यक्ति को सकुशल निकाल लिया गया है। सूचना मिलने के बाद पटौदी से विधायक सत्यप्रकाश जरावता भी मौके पर पहुंचे। रात दस बजे तक किसी की मौत की पुष्टि प्रशासन की ओर से नहीं गई।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार जिस व्यक्ति को जिंदा निकाला गया उसका नाम प्रदीप है। घटना साढ़े चार से पांच बजे के बीच की बताई गई है। पुलिस ने बताया कि एक ट्रांसपोर्ट कंपनी का यहां वेयरहाउस बना था। जिसके साथ में यह इमारत बनी हुई थी। इस इमारत में करीब पांच से छह लोग थे, जिस समय घटना हुई। राहत बचाव कार्य रात दस बजे तक रेस्क्यू में जुटे रहे। पांच घंटे की मशक्कत के बाद भी केवल एक ही व्यक्ति को सकुशल निकाला जा सका। राहत बचाव दल के 100 से ज्यादा कर्मचारी मौके पर रेस्क्यू करने में जुटे हुए हैँ।

चश्मदीद मनीष ने बताया कि साढ़े चार बजे के करीब अचानक तेज धमाका हुआ। वह पास की ही इमारत में था। देखते ही देखते आसमान में धूल का गुब्बार छा गया। मीनीष ने बताया कि इससे पहले भी इमारत की दीवार बारिश में एक बार एक ओर झुक गई थी। जिसके बाद इसकी मरम्मत करवाकर ठीक करवाया गया था। मनीष ने बताया कि इमारत के भूतल पर स्टोन बना हुआ था। जबकि ऊपर के दो मालों पर कर्मचारी रहते थे। मनीष ने बताया कि घटना के बाद मलबे के नीचे से दबे लोगों के चीखने और चिल्लाने की आवाजें भी आ रही थी। घटना के बाद आस-पास के गांवों से भी लोग मौके पहुंच गए।