''कौन कहता है आसामां में छेद नहीं होता एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो'' यह पंक्तियां और जिनू गोगोई की कहानी हर पल आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देते है। जिनू गोगोई जिसे घर की बदहाल आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए पढाई को उसे आधे में ही समेटकर किसी के घर में नौकरानी का काम करना पड़ा। लेकिन जिनू की मालकिन और उसने मिलकर एक नई इबारत लिख दी। जिनू ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2020 में लॉन बॉल प्रतियोगिता में कांस्य पदक हासिल कर कीर्तिमान स्थापित किया। और इसमें उसकी मालकिन ने उसका भरपूर साथ दिया।

 

असम के चराईदेउ जिले के बरहाट चुतियाकारी गांव के आनंद गोगोई और मामोनि गोगोई की छोटी बेटी है जिनू। जिनू बरहाट नतून हाईस्कूल नौंवी कक्षा की छात्रा थी। पढ़ने में वह बहुत अच्छी नहीं थी। लेकिन खेल में उसकी रुचि थी। जब वह आठवीं कक्षा में पढ़ रही थी तब उसे पता चला कि उसके पिता को कैंसर हो गया है। पिता आनंद गोगोई ड्राइवर का कार्य कर परिवार चलाते थे। लेकिन कैंसर होने के बाद परिवार की आय बंद हो गई। पहले स्थानीय लोगों की मदद से आनंद का इलाज कराया गया। अब भी उसका पिता इलाजरत है। परिवार चलाने के लिए जिनू की मां चाय बागान की फैक्ट्री में मजदूरी करने लगी। जिनू को परिवार का खर्च चलाने के लिए गुवाहाटी नौकरानी बनकर आना पड़ा। गुवाहाटी में जिनू लॉन बॉल के प्रति आकर्षित हुई। उसकी मालकिन को जिनू की इस बात का पता चला तो उन्होंने इसके प्रशिक्षण की व्यवस्था कर दी।

 

मालकिन बीमा बोरा भी खिलाड़ी रही हैं। जिनू बीमा के बेटे की देखभाल करने के साथ ही लॉन बॉल की प्रशिक्षण लेने लगी। इस तरह उसने खेलो इंडिया के लॉन बॉल की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और कांस्य पदक हासिल किया। इससे उसके गांव में उत्साह का माहौल है। जिनू के माता-पिता ने जिनू की मालकिन बीमा बोरा का धन्यवाद किया कि उसने उनकी बेटी की प्रतिभा को पहचाना और हरसंभव मदद की।पत्रकारों से बातचीत में जिनू ने कहा कि उसे सरकार से जो भी रकम मिलेगी उससे अपने पिता का इलाज कराएगी।

अब हम twitter पर भी उपलब्ध हैं। ताजा एवं बेहतरीन खबरों के लिए Follow करें हमारा पेज : https://twitter.com/dailynews360