कोरोना (Covid19) के खिलाफ लड़ाई के तहत देशभर में युद्ध स्तर पर टीकाकरण (Corona Vaccine) हो रहा है, लेकिन इसी बीच महाराष्ट्र के कलवा स्थित स्वास्थ्य केंद्र से बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां के अतकोनेश्वर स्वास्थ्य केंद्र पर कोरोना का टीका लगवाने आए व्यक्ति को एंटी रेबीज का इंजेक्शन (Anti Rabies Injection)(कुत्ते के काटने पर लगने वाला इंजेक्शन) लगा दिया गया। 

जानकारी के मुताबिक, अतकोनेश्वर स्वास्थ्य केंद्र पर राजकुमार यादव कोरोना का टीका (Corona Vaccine) लगवाने गए थे। उन्हें कोविशील्ड लगाई जानी थी, लेकिन राजकुमार गलती से उस लाइन में खड़े हो गए जहां एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया जा रहा था। जब उनकी बारी आई तो वहां मौजूद नर्स कीर्ति पोपड़े ने बिना कागज देखे उन्हें एंटी रेबीज इंजेक्शन लगा दिया।

जब मामला सामने आया तो जिला प्रशासन में हडक़ंप मच गया। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के कागजों की जांच करना नर्स की जिम्मेदारी है। नर्स की लापरवाही से व्यक्ति की जान को खतरा पैदा हुआ। नर्स को निलंबित कर दिया गया है। गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है, जब कोविड टीकाकरण के दौरान ऐसी लापरवाही सामने आई है। इसी साल अप्रेल माह में उत्तर प्रदेश के शामली में कोरोना वैक्सीनेशन के दौरान तीन महिलाओं को कोरोना की जगह एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगा दिया गया था। इनमें से 70 साल की एक महिला की तबीयत खराब होने पर मामले का खुलासा हुआ। तीनों महिलाओं की उम्र 60 साल से ज्यादा थी। 

घटना शामली के कांधला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुई थी। कांधला निवासी सरोज, अनारकली और सत्यवती कोरोना वैक्सीन का पहला डोज लगवाने स्वास्थ्य केंद्र गई थीं। यहां मौजूद कर्मचारियों ने मेडिकल स्टोर से 10-10 रुपए की सीरिंज मंगवाई और तीनों को वैक्सीन लगा दी। इसके बाद तीनों अपने घर आ गईं। थोड़ी देर बाद ही सरोज की हालत बिगड़ गई। परिवार ने उन्हें प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया। यहां डॉक्टर ने स्वास्थ्य केंद्र की पर्ची देखकर बताया कि उन्हें एंटी रेबीज टीका लगा दिया गया है। ममाला सामने आने के बाद जिला अधिकारी बताया ने ड्यूटी पर तैनात रहे फार्मासिस्ट को सस्पेंड कर दिया था।