असम विधानसभा चुनाव में ऑल इंडिया युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) और वाम दलों के साथ गठबंधन की घोषणा करने के बाद कांग्रेस जल्द ही साझा न्यूनतम कार्यक्रम तय करने जा रही है, हालांकि सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों को नियमित स्कूल में तब्दील करने के भाजपा सरकार के फैसले से जुड़े मुद्दे को इसमें शामिल करने को लेकर वह दुविधा में है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस की असम इकाई के नेताओं के एक धड़े का मानना है कि इस तरह के मुद्दों पर जोर देने से चुनाव में भाजपा (BJP) को ध्रुवीकरण का अवसर मिलेगा। दूसरी तरफ, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रिपुन बोरा का कहना था कि राज्य सरकार के इस 'असंवैधानिक फैसले' को अदालत में चुनौती दी जाएगी और इसको लेकर गठबंधन की प्रस्तावित समन्वय समिति में चर्चा भी होगी।

राज्य में फिलहाल प्रमुख विपक्षी दल की भूमिका निभा रही कांग्रेस ने मुस्लिम समुदाय के बीच जनाधार रखने वाले एआईयूडीएफ के अलावा माकपा, भाकपा एवं भाकपा(माले) तथा प्रदेश की क्षेत्रीय पार्टी आंचलिक गण मोर्चा के साथ गठबंधन की घोषणा की है। राज्य में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है। रिपुन बोरा ने बताया, ‘भाजपा को सरकार से बाहर करने और असम के विकास के लिए छह दल साथ आए हैं। हम कुछ और क्षेत्रीय दलों से भी बातचीत कर रहे हैं और उम्मीद है कि इस गठबंधन का और विस्तार होगा।’

उन्होंने कहा, ‘बहुत जल्द हम साझा न्यूनतम कार्यक्रम तय करेंगे और एक समन्वय समिति भी बनाएंगे। यह समिति ही आगे की रणनीति और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेगी।’ यह पूछे जाने पर कि किन मुद्दों को साझा न्यूनतम कार्यक्रम में स्थान मिल सकता है, बोरा ने कहा, ‘सीएए (संशोधित नागरिकता कानून) और एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर), असम के विशेष दर्जे का मुद्दा, प्रदेश को केंद्र से 90:10 के अनुपात में धन नहीं मिलना, राज्य में मौजूद सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण और राज्य के विकास से जुड़े कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर सबकी सहमति है।’